______ महिला संगठनो ने कहा- इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला निंदनीय ….!!
लखनऊ / उत्तर प्रदेश
जनवादी महिला समिति सहित शहर के महिला संगठनों व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्री राममनोहर नारायण मिश्रा द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत एक नाबालिग बच्ची के मामले में दिये गये फैसले की कटु निन्दा की है तथा चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह फ़ैसला बलात्कारियों के हौसले बुलन्द करेगा जिसका महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विदित हो कि नाबालिग पीड़िता के साथ तीन आरोपियों द्वारा बलात्कार का प्रयास किया गया और राहगीरों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी भाग गये। पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि आरोपियों ने उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ तथा उसे निर्वस्त्र करने की भी कोशिश की। कासगंज ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों के ख़िलाफ़ बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया किन्तु हाईकोर्ट ने उसके फ़ैसले को पलट दिया और इसे पोक्सो एक्ट के तहत छेड़खानी के मामले में दर्ज करने का आदेश दिया ।
महिला संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि निर्भया कांड के बाद गठित जे एस वर्मा कमेटी ने बलात्कार की व्यापक परिभाषा निर्धारित की थी। वर्मा कमेटी की सिफ़ारिशों में मैजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के बयान को भी पर्याप्त सबूत माना है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक फ़ैसले में कहा था कि नाबालिग बच्ची के प्राइवेट पार्ट को ग़लत नीयत से छूना बलात्कार के तहत आयेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बन्ध में बाॅम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को पलटा था।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का यह फ़ैसला समाज में बच्चियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा को बढ़ावा देगा । संगठनों ने माँग की है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट इस फ़ैसले का स्वत: संज्ञान लें और ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार आरोपियों को सज़ा दे।
