___ इस देश का लोकतंत्र वाक़ई निराला है —यहाँ कभी धर्म संकट में नहीं होता,यहाँ धर्म ही संकट बना दिया जाता है…!!
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पता नहीं कौन खतरे में है…
भारतीय लोकतंत्र का फुल ड्रामा शो!
इस देश का लोकतंत्र वाक़ई निराला है —यहाँ कभी धर्म संकट में नहीं होता,यहाँ धर्म ही संकट बना दिया जाता है।
अब देखिए स्वघोषित हिंदुत्व की ठेकेदार पार्टी भाजपा की टीम को —
जो रोज़ टीवी पर चिल्लाते हैं : हिंदू खतरे में है!
लेकिन आवाज़ कहाँ से आ रही है?
* शहजाद पूनावाला: मुसलमान
* ज़फ़र इस्लाम: मुसलमान
* शाजिया इल्मी: मुसलमान
* शाहनवाज हुसैन: मुसलमान
और एंकरों की जो टुकड़ी उनके के सुर में माइक पीटती है,
वो हैं :
* रुबिका लियाकत: मुसलमान
* रोमाना खान: मुसलमान
मतलब हिंदुत्व बचाने की सबसे तेज़ आवाज़ें वहीं से आती हैं जहाँ मुसलमान लिखा होता है।
अब बेचारा हिन्दू खुद सोच रहा है —
मैं खतरे में हूँ या मेरी तरफ़ से बोलने वाले?
इधर सेकुलर पार्टी कांग्रेस है —
जिसे अल्पसंख्यकों की पार्टी तंज में कहा जाता है,
वहाँ प्रवक्ता हैं:
* सुरेन्द्र राजपूत
* पवन खेरा
* सुप्रिया श्रीनेत
* अजय उपाध्याय
* अभय दुबे
ये है लोकतंत्र का जादू ,जहाँ असली नहीं, प्रतीकात्मक चीज़ें बिकती हैं।
जैसे संसद में बहस नहीं होती,
सिर्फ कैमरे का कोण तय करता है कि कौन देशभक्त है और कौन ग़द्दार।
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अब जनता सोच में है
खतरे में कौन है?
* क्या हिन्दू खतरे में है?
* क्या मुसलमान खतरे में है?
* क्या लोकतंत्र खतरे में है?
* या फिर सिर्फ सच्चाई खतरे में है?
शायद खतरे में सिर्फ वो नागरिक है —जो हर चुनाव में वोट डालता है,
हर टीवी डिबेट में हिंदू पर खतरे की चिल्लाहट सुनता है,और फिर महँगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे सवाल पूछता है —
तो हिंदुत्व के ठेकेदारों द्वारा कहा जाता है,
अबे चुप बैठ, हिंदू खतरे में है।
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