_____ कगार के आखिरी सिरे पर’ का लोकार्पण: कहानियों में समय की सच्चाई और संघर्ष का स्वर….!!!
____ कला, लोगों की मानसिक तलाश को दूर करने का एक सशक्त माध्यम. ..!!
लखनऊ / उत्तर प्रदेश
वरिष्ठ कथाकार प्रताप दीक्षित के नवीन कहानी-संग्रह “कगार के आखिरी सिरे पर” का लोकार्पण रविवार को कैफ़ी आज़मी अकादमी, लखनऊ में हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, शोधार्थियों और पाठकों की उपस्थिति रही…!!
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक वीरेन्द्र यादव ने की ..कार्यक्रम का प्रारम्भ प्रताप दीक्षित के कहानी संग्रह के लोकार्पण के साथ हुआ। इसके बाद शालिनी सिंह और सलमान ख़याल ने प्रताप दीक्षित की कहानी ‘ब्लैकहोल’ का पाठ किया। कहानी के जीवंत पाठ ने आज के कम्प्यूटरीकरण के युग में लोगों की नौकरियों के अस्तित्व और उससे सामंजस्य बनाते लोगों की जिजीविषा को सजीव कर दिया…!!
अपने आत्मकथ्य में लेखक प्रताप दीक्षित ने श्रोताओं से बताया कि कहानियाँ उनके लिए सिर्फ़ रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और जीवन के अनुभवों को भी साझा करती हैं। लेखन-कला पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि कला, लोगों की मानसिक तलाश को दूर करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि उनके तीनों कहानी संग्रहों में दर्ज कहानियाँ सच की तलाश और स्मृतियाँ हैं और उन सामान्य लोगों की आवाज़ हैं, जिनके संघर्ष अक्सर साहित्य में अनसुने रह जाते हैं। उन्होंने संग्रह के लिए अपने परिवारजनों एवं साथियों का धन्यवाद दिया…!!
चर्चा सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने संग्रह की मुक्त-कंठ से प्रशंसा की और उनकी कहानियों पर अपने विचार रखे…!!
जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव, प्रसिद्ध आलोचक एवं कवि नलिन रंजन सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रताप दीक्षित की कहानियों मे अक्सर ही उनकी जीवन-यात्रा से जुड़े संकेत मिलते हैं। संग्रह की भाषा और शिल्प की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संग्रह की कहानियाँ आज के समय की कहानियाँ हैं जिनमें सादगी से कह दी गयी बात और उसके गहरे प्रभाव के बीच वास्तविकता हमारे समय की व्यंजनाओं को बख़ूबी उजागर करती हैं । उन्होंने प्रताप दीक्षित की कहानियों में सबल स्त्री पक्ष के मुखर रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की सराहना करते हुए उन्हें उनके संग्रह के लिए बधाई दी..!!
प्रसिद्ध कथाकार रजनी गुप्त ने अपने वक्तव्य में संग्रह में शामिल कहानियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि रचना जीवन के साथ ही शुरू होती है। लेखक के निजी जीवन के दबाव या तनाव लेखन के महत्वपूर्ण पहलू बन जाते हैं। उन्होने ख़ास तौर पर ‘दीमक’ कहानी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कहानी में रचना संसार की वास्तविकता को बख़ूबी दर्शाया गया है । अंतर्ध्वनियों पर लेखक की पकड़ पर बोलते हुए रजनी गुप्त ने कहा कि यह आज की रचनाओं में कम देखने को मिलता है..!!
वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रताप दीक्षित की कहानियों के पात्र आज के समय में भी सक्रिय हैं, उनके पात्र परास्त पात्र नहीं हैं। वे धारा के विपरीत तैरते पात्र हैं । उनकी कहानियों- ‘अगली सुबह फ़लक पर..,’ ‘व्यवस्था चालू आहे’, ‘दीमक’ इत्यादि के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन कहानियों में हमारे लगातार रुग्ण होते समाज की दारुण अनुगूँज है..!!
सम्पादक एवं कथाकार शैलेन्द्र सागर ने कहा कि प्रताप दीक्षित की कहानियाँ पाठकों तक सीधे सम्प्रेषित होती हुई सहज, पठनीय और रोचक कहानियाँ हैं। उन्होंने कहा कि प्रताप दीक्षित की कहानियों के चरित्र लेखन, रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोग और बैंककर्मी के रूप में सामने आते हैं जो कि उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को कई स्तरों पर छूती हैं। उन्होंने बताया कि प्रताप दीक्षित की कहानियाँ सकारात्मक सोच के साथ उम्मीद देती हुई कहानियाँ हैं। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि प्रताप जी कहानी लेखन के साथ समीक्षा कर्म में भी सक्रिय हैं और पिछले आठ दस साल में उन्होंने जितनी भी समीक्षाएँ लिखी हैं, सबमें एक सधी हुई भाषा है। उन्होंने कहा कि समीक्षा की भाषा और कहानियों की भाषा में एक स्पष्ट अंतर होना लेखनकर्म के लिए अच्छा संकेत है…!!
अध्यक्षीय वक्तव्य में वीरेन्द्र यादव ने कहा कि प्रताप दीक्षित की कहानियाँ सार्थक कहानियाँ हैं। उनकी कहानियों में जो मूल्य हैं वे पुराने मूल्य नहीं बल्कि ज़रूरी मूल्य हैं। “कगार के आखिरी सिरे पर” संग्रह की पहली कहानी ‘अगली सुबह फ़लक पर…’ प्रताप दीक्षित के सरोकारों को समझने के लिए एक सूत्र प्रदान करती है। आज के बदलते हुए समाज में लोग अपनी हित-साधना के लिए किस प्रकार धार्मिक-सामाजिक ध्रुवीकरण का शिकार हो रहे हैं- उसकी गहरी पड़ताल करते हुए प्रताप जी न केवल समकालीन कहानी में प्रेमचंद की परम्परा को सफलतापूर्वक जोड़ते हैं बल्कि इस समाज के यथार्थ पर करारा प्रहार भी करते हैं। मूल्यों के विघटन के समय में प्रताप दीक्षित के लेखक के तौर पर सरोकार आज के समय में बहुत आवश्यक हैं। संग्रह में शामिल कहानियों की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे संग्रह समाज को सोचने और बदलने की प्रेरणा देते हैं..!!
कार्यक्रम का संचालन समीना खान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन ज्ञानप्रकाश चौबे ने किया…!!
जनवादी लेखक संघ, लखनऊ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्यिक वातावरण को नयी ऊर्जा प्रदान की। उपस्थित श्रोताओं ने भी इस बात पर सहमति जताई कि कहानियों का यह संग्रह आज की पीढ़ी के लिए समाज और जीवन को समझने का एक आवश्यक पाठ है..!!
