जब से शिक्षा का व्यवसायीकरण शुरू हुआ है तब से शिक्षा के नैतिक चरित्र का पतन शुरू हो गया है अंधविश्वास और वार्ड नंबर को शिक्षा में शामिल किया जा रहा है वैज्ञानिक शिक्षा की पद्धति समाप्त होती जा रही है जिसकी वजह से छात्र छात्राएं केवल साक्षर बनाई जा रहे हैं!
भारत जैसे देश में जब तक शिक्षक की पद्धति वैज्ञानिक नहीं होगी तब तक इसी तरीके से आडंबर और अंधविश्वास बढ़ता रहेगा महंगाई बेरोजगारी जैसी समस्याएं पैदा होती रहेगी क्योंकि शिक्षा सभी समस्याओं को हल करती है नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद से वैज्ञानिक शिक्षा का पूरी तरीके से बंटाधार हो गया है जिस किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है!
