काव्य गंगा
अदम गोंडवी के नाम से चर्चित शायर रामनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हुआ। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘धरती की सतह पर’ और ‘समय से मुठभेड़’ जैसे काव्य संग्रह हैं। आज उनके जन्मदिन पर पेश हैं उनकी गज़लों के कुछ अंश:
गाँव का मौसम
तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आँकड़ें झूठे हैं ये दावा किताबी है
उधर जम्हूरियत* ढोल पीटे जा रहे हैं वो
इधर पर्दे के पीछे बर्बरीयत है नवाबी है
लगी है होड़-सी देखो अमीरी और ग़रीबी में
ये पूँजीवाद के ढाँचे की बुनियादी ख़राबी है
तुम्हारी मेज़ चाँदी की तुम्हारे जाम सोने के
यहाँ ज़ुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी* है
हाथ में छाले हैं
वो जिसके हाथ में छाले हैं, पैरों में बिवाई है
उसी के दम से रौनक आपके बँगलों में आई है
इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का,
उधर लाखों में गाँधी जी के चेलों की कमाई है
ये रोटी कितनी महँगी है ये वो औरत बताएगी,
कि जिसने जिस्म गिरवी रखके ये क़ीमत चुकाई है
क़ौम की औक़ात
हिन्दू या मुसलिम के अहसासात को मत छेड़िए
अपनी कुरसी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िए
हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, ज़ार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िए
छेड़िए इक जंग, मिल-जुल कर ग़रीबी के ख़िलाफ़
दोस्त, मेरे मज़हबी नग़मात को मत छेड़िए।
Forwarded message
