______ क्या है संभल के बारे में गजेटियर में ?
__ Subhash Chandra Kushwaha.!
मुस्लिम काल से पूर्व के इतिहास को किसी प्रमाणिकता के आधार पर कुछ नहीं बताता है क्योंकि आपके यहां इतिहास तो लिखा ही नहीं गया था. 1911 का गजेटियर कहता है कि- संभल कभी दिल्ली और बदायूं के बीच, व्यापरियों का पड़ाव था. अपनी हरियाली, प्राकृतिक वातावरण और 52 सरायों की वजह से वह व्यापरियों के रुकने की मुफिद जगह थी. यहां संतरे के बाग थे.
18वीं सदी में सबसे महत्वपूर्ण लोगों में यहां के एक अमीर साहूकार, ब्रहमण थे, जिनका नाम मिश्रा शितल प्रसाद था. वह यहां के बैंकर और जमींदार थे. जमींदार चौधरी महमूद खान, मूलतः राजपूत थे जो धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बन चुके थे. ऐसे राजपूतों को मूलतः खोखार कहा जाता था जो पंजाब क्षेत्र से आए थे.
आशिक हुसैन खान, अंसारी शेख थे और नवाब अमीन-उल-दौला के वंशज थे तथा मियां सराय में रहते थे. उन्होंने एक किला भी बनवाया था जिसे उन्नीसवीं सदी तक लखी चबूतरा कहा जाता था. कोट के मुफ्ती, काजी आदि भी यहां के प्रमुख लोगों में से थे. जाहिर है, मुसलमानों के आने के पूर्व यहां हिन्दू ही रहते थे.
मुस्लिम शासकों के कब्जे के पूर्व संभल पर तैमूर और चौहानों का कब्जा था. कहा जाता है कि पृथ्वीराज की एक बहन यहीं पास में सती हुई थी.
कहा यह भी जाता है कि इस शहर को राजा जगत सिंह ने बसाया था और कुओं का निर्माण कराया था. उसके बाद सिकन्दर लोदी ने संभल पर कब्जा जमाया. जौनपुर जाने से पूर्व उसने कुछ सालों तक संभल को अपनी राजधानी बनाया.
तब यहां के कोट पर हिन्दू मंदिर होने की बात कही जाती है, जिसे विष्णु मंदिर (हरि मंदिर) कहा जाता था.
मंदिर का निर्माण अलग-अलग समय में अलग-अलग राजाओं द्वारा किये जाने की सम्भावना बताई गई है जिनमें पृथ्वीराज, राजा जगत सिंह, नाहर सिंह आदि का नाम आता है, लेकिन सिकन्दर लोदी के समय तक वहां मंदिर का अवशेष था और उसे क्षति नहीं पहुंचायी गयी थी.
बाद में कहा जाता है कि बाबर के सिपहसालार, हिंदू बेग ने 1526 में यहां मस्जिद का निर्माण कराया था, ठीक उसी तरह, जिस तरह अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बारे में कहा जाता था.
1911 का गजेटियर यह भी कहता है कि बाबर ने मस्जिद का निर्माण कराया था या पूर्व की बनी किसी मस्जिद की मरम्मत कराई थी, स्पष्ट नहीं है.
मंदिर-मस्जिद विवाद ब्रिटिश काल में सिविल कोर्ट मे भी गया था, मगर वहां खारिज हो गया था.
1874 में इतिहासकार मि. Carleylle ने संभल की मस्जिद का निरीक्षण किया था. संभल मस्जिद की गुम्मद, बदायूं की प्रसिद्ध मस्जिद की गुम्मद से मेल खाती थी..इसकी वास्तुकला पर हिन्दू-मुस्लिम वास्तुकला का प्रभाव है, जैसा कि जौनपुर से लेकर फतेहपुर सिकरी तक के तमाम ऐतिहासिक इमारतों की वास्तुकला पर हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति का प्रभाव दिखता है.
गजेटियर कहता है-इस मस्जिद की वास्तुकला अकबर काल के पूर्व की लगती है. आइने-अकबरी में अकबर के समय में संभल में मस्जिद के अलावा, विष्णु मंदिर होने का प्रमाण है.
इससे यह सिद्ध होता है कि अकबर के काल में संभल में मस्जिद और मंदिर दोनों अस्तित्व में थे. मस्जिद के दक्षिण ओर का एक शिलालेख प्रमाणित करता है कि 1657 में रूस्तम खान दक्खिनी ने इस मस्जिद की मरम्मत कराई थी. इसी प्रकार उत्तर का शिलालेख यह बताता है कि सैयद कुथ नामक व्यक्ति ने उसका निर्माण कराया था.
1857 के बाद हिन्दू-मुस्लिम विवाद बढ़ाकर अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को तोड़ने का प्रयास किया था मगर उनके कोर्ट ने भी इतिहासकार Carleylle की रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया था.
*अब आप इस मुद्दे को खोदकर देश को कमजोर ही करेंगे.*
*इतिहास में एक जमीन, कभी किसी एक की नहीं रही है. आज अगर सभी पुराने राज-परिवार अपनी-अपनी जमीनें मांगने लगें तो देश ही टूट कर खत्म हो जायेगा!*
*इसलिए गडे मुर्दे उखाड़े नहीं जाते, वह भी तब, जब कोई लिखित दस्तावेज न हो!*
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