______ अमेरिका के दबाव का प्रयास नया नहीं है, ‘रगों में दौड़ते गरम सिंदूर’ का ठंडा पड़ जाना नया है…!!
नई दिल्ली. .!!
1965 के युद्ध के दौरान अमेरिका ने धमकी दी कि अगर भारत ने संघर्षविराम नहीं किया तो वह गेहूं की आपूर्ति रोक देगा। भारत को आजाद हुए मात्र 18 साल हुए थे। भारत कमजोर था। अनाज की घोर कमी थी..!!
शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे। सीधे स्वभाव के थे। उनकी रगों में गरम सिंदूर नहीं था, खून ही बहता था। झुकने से इनकार कर दिया। अपनी पत्नी से कहा, आज खाना मत बनाओ। मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं। अगले दिन उन्होंने देशवासियों से अपील की कि सप्ताह में एक समय का भोजन न करके अनाज बचाएं..!!
इस बात को उन्होंने देश के स्वाभिमान से जोड़ा और हरित क्रांति की शुरुआत की जिसे इंदिरा गांधी ने काफी तेजी से आगे बढ़ाया और लगभग डेढ़ दशक भारत अनाज का निर्यातक बन गया। उनका जय जवान, जय किसान का नारा भारत के स्वाभिमान का नारा बन गया..!!
सबसे ज्यादा अमेरिकी दबाव इंदिरा गांधी के समय आया लेकिन वे भी नहीं झुकीं। न 1971 में जब अमेरिका ने सैन्य बेड़ा भेजने की धमकी दी, न ही 1974 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया और अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए। 75 साल से भारत ने किसी देश को खुद पर हावी नहीं होने दिया था..!!
सीना नापने, डंका बजवाने और नसों में सिंदूर दौड़ाने के दौर में यह दिन भी देखना पड़ रहा है जब युद्धविराम का ऐलान हमारे प्रधानमंत्री ने नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया और दुनिया भर में घूम-घूमकर आठ बार दोहराया कि हमने युद्धविराम करवाया..!!
_____भारत इस शर्म से कैसे उबरेगा?
