_______ऑपरेशन सिंदूर की पाकिस्तान को जानकारी देना देशद्रोह की श्रेणी में आता है या नहीं बताएं सरकार…!!
____ऑपरेशन सिंदूर से पहले दुश्मन को विदेश मंत्रालय द्वारा जानकारी देना सेनाओं को पड़ा भारी…!!
नई दिल्ली. .!!
कश्मीर के पहलगांव में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान में चल रहे आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूत करने को चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से पहले दुश्मन को विदेश मंत्रालय द्वारा जानकारी देना सेनाओं को भारी पड़ी है जैसा कि CDS अनिल चौहान ने अपने इंटरव्यू में बताया कि – “कितने जहाज गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं; क्यों गिरे, यह महत्वपूर्ण है।”
क्या यह देश की सेनाओं के साथ धोखा नहीं है, जिसका ख़ामियाजा सेना को भुगतना पड़ा है. क्या यह देश के साथ गद्दारी नहीं. .?? सरकार को जवाब तो देना ही पड़ेगा ..!!
जैसा की विदेश मंत्री में सार्वजनिक तौर बयान दिया कि आपरेशन सिंदूर की आतंकी ठिकानों पर हमला करने से पहले जानकारी दे दी गई थी जानकारी क्यों दी गई विदेश मंत्री को कारण स्पष्ट करना चाहिए क्या किसी देश पर हमला करने से पहले उस देश को सतर्क रहने के लिए जानकारी दी जाती है..!!
जो भाजपाई सरकार की आलोचना करने वालों को गद्दार देशद्रोही कहकर गालियां देते रहते है। अब क्या उनके मुंह में दही जम गया है क्या विदेश मंत्री ने आपरेशन सिंदूर की पाकिस्तान को अग्रिम जानकारी देकर देश के साथ गद्दारी नहीं की है ..??
विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दी गई जिसकी वजह से भारत की सेवा को भारी नुकसान उठाना पड़ा पाकिस्तान ने कई एक लड़ाकू विमान मार गिराए यह बात सीडीएस अनिल चौहान ने स्वीकार की है उन्होंने दबी जुबान से यह भी कहा है की गलती कहां पर हुई विमान क्यों गिराए गए वह मुख्य मुद्दा है ऑपरेशन सिंदूर की विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान को दी गई जानकारी से सेना का भारी नूकसान हुआ है। इस नुकसान के लिए सीधे तौर पर विदेश मंत्री जिम्मेदार हैं..!!
ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी पाकिस्तान को किस आधार पर दी गई यह बात स्पष्ट होनी चाहिए देश की जनता जानना चाहती है की ऑपरेशन सिंदूर की पाकिस्तान को जानकारी देना देश के साथ गद्दारी देशद्रोह की श्रेणी में आती है या नहीं..!!
विपक्षी दलों द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी के बाद सेना को धन्यवाद देने और ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति की देशवासियों को जानकारी देने के लिए बराबर लोकसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग कर रहे हैं ताकि ऑपरेशन सिंदूर से उत्पन्न हुई परिस्थितियों पर चर्चा की जा सके परन्तु सरकार ने विपक्षी दलों की मांग को सिरे से नकार दिया है जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है..!!
