_______गजा में इजराइली नरसंहार के खिलाफ पेरिस से उठी बुलंद आवाज. ..!!
_______फ़्रांस की अवाम इन नारों के साथ एक गहरी नींद के बाद अब आख़िरकार जाग रही है।
पेरिस की अवाम ने नारा किया बुलंद “ग़ज़ा, ग़ज़ा, पेरिस तेरे साथ है…”!!!
(??✊ “Gaza, Gaza, Paris est avec toi”)
नई दिल्ली. ..!!
1 जून 2025 को, इंसाफ़ और हक़ की आवाज़ बनकर “Freedom Flotilla” निकली थी। एक सादा नाव, जिस पर न हथियार थे, न बारूद। था तो सिर्फ़ ज़रूरतमंदों के लिए ब्रेड, दवाएं और बच्चों का दूध।
इस नाव पर सवार थीं फ़्रांस की MEP (मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट) रीमा हसन, एक फिलिस्तीनी मूल की फ़्रांसीसी मुसलमान बहन, जो यूरोपीय संसद की मेंबर हैं। साथ में थी ग्रेटा थनबर्ग और दूसरे इंसानी हक़ के सिपाही।
_____ लेकिन क्या हुआ?
इज़राइली फौज ने इंटरनेशनल समुंद्र में घुसकर इस शांति मिशन को रोक दिया। नाव में सवार तमाम लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया। यहां तक कि उन्हें “हथियारबंद दुश्मन” की तरह ट्रीट किया गया। मानो वो लड़ाई का सामान लेकर जा रहे हों, जबकि उनके नाव में खाना, दूध, दवाई और हाथों में सिर्फ़ इंसाफ़ का परचम था।
रीमा हसन ने जाने से पहले कहा था कि “अगर हमारी नाव रोकी जाती है, तो कोई बहाना न देना। सब सड़कों पर निकलना। हम पीछे नहीं हटेंगे!”
यही आवाज़ आज पेरिस की गलियों में गूंज रही है।
लाखों लोग सड़कों पर हैं। नारा वही “ग़ज़ा, ग़ज़ा, पेरिस तेरे साथ है!”
फ़्रांस की हुकूमत तो चुप है, लेकिन फ़्रांस की अवाम जाग चुकी है। Place de la République में इंसाफ़ के दीवाने जमा हैं। उनके हाथों में फ़लिस्तीनी झंडे हैं, न और सिर्फ़ आवाज़ है… रीमा की आवाज़। ग़ज़ा की आवाज़। इंसानियत की आवाज़।
??✊ “Gaza, Gaza, Paris est avec toi”
