______ नशे की लत बनती जा रही है सामाजिक अभिशाप, युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा…!!
यदुवंशी आरपी यादव , बेगूसराय, बिहार..!!
भारत में नशे की लत एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप ले चुकी है। देश की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले युवा वर्ग के बीच नशे का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह नशा केवल व्यक्तिगत विनाश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज और देश के विकास में भी बड़ी बाधा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और युवा शक्ति को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। आंकड़ों की मानें तो भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि यही युवा पीढ़ी आज नशे के दलदल में फंसती जा रही है।
गांव से लेकर शहरों तक नशे का बाजार दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है। शराब, तंबाकू, गांजा, अफीम, नशीली दवाइयों के साथ-साथ कोकीन, हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे घातक पदार्थों की खपत लगातार बढ़ रही है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह समस्या तेजी से पैर पसार रही है, जो समाज के लिए चिंता का विषय बन गई है।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि नशे के बढ़ते प्रभाव से युवाओं में नैतिक पतन, अपराध की प्रवृत्ति, स्वास्थ्य समस्याएं और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। नशे के कारण कई घर तबाह हो रहे हैं और माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
समाज के जागरूक लोगों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि पूरे समाज को जागरूक होना होगा। स्कूल, कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाना, पारिवारिक संवाद को बढ़ाना और प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो देश की सबसे बड़ी ताकत कही जाने वाली युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगी। समय की मांग है कि हम सब मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एकजुट हों ताकि भारत का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बना रहे।
