*- मुक्ति का मार्ग-*
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*तुम्हारी मुक्ति का मार्ग धर्मशास्त्र व मंदिर नहीं है बल्कि उच्च शिक्षा, व्यवसायी बनाने वाले रोजगार तथा उच्च आचरण व नैतिकता में निहित है.!
तीर्थयात्रा, व्रत, पूजा-पाठ व कर्मकांडों में कीमती समय बर्बाद मत करो!
धर्मग्रंथों का अखंड पाठ करने, यज्ञों में आहुति देने व मंदिरों में माथा टेकने से तुम्हारी दासता दूर नहीं होगी.
तुम्हारे गले में पड़ी तुलसी की माला गरीबी से मुक्ति नहीं दिलायेगी.
काल्पनिक देवी-देवताओं की मूर्तियों के आगे नाक रगड़ने से तुम्हारी भुखमरी, दरिद्रता व गुलामी दूर नहीं होगी!*
अपने पुरखों की तरह तुम भी चिथड़े मत लपेटो, दड़बे जैसे घरों में मत रहो और इलाज के अभाव में तड़प-तड़पकर जान मत गंवाओ!
भाग्य व ईश्वर के भरोसे मत रहो, तुम्हें अपना उद्धार खुद ही करना है. धर्म मनुष्य के लिए है मनुष्य धर्म के लिए नहीं और जो धर्म तुम्हें इंसान नहीं समझता वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है. जहां ऊंच नीच की व्यवस्था है वह धर्म नहीं गुलाम बनाए रखने की साजिश है.*
*— डा. भीमराव अम्बेडकर*
