100 दिवसीय सत्याग्रह के अंतिम दिन 19 दिसंबर को बनारस आइए
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_____ 19 दिसंबर 1927 को रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला, ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई थी। इन शहीदों ने देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था। देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जिस आजादी को अपनी कुर्बानी देकर अंग्रेजों से हासिल किया था, आज वह आजादी खतरे में है। ब्रिटिश सरकार जैसा ही जुल्म जारी!
बंधुवर
वाराणसी सर्व सेवा संघ के गेट पर उपवास सत्याग्रह के 85 दिन पूरे हो गए 15 दिन और शेष है।
□ गांधी विचार पर हमला!
□ किताबों का कूड़े की तरह से फेंका जाना!
□ विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण पर फर्जी तरीके से जमीन लेने का घटिया आरोप (अपमानित करने)
□ सरकार के मनमानेपन और गैरकानूनी तरीके से ऐतिहासिक इमारतों को गिराए जाने के खिलाफ चल रहे, इस उपवास सत्याग्रह में
अभी तक 23 राज्यों के, 156 जिलों से, 363 लोगों ने सत्याग्रह किया है। 30 से अधिक संगठनों और 2400 से अधिक साथियो ने बैठकर समर्थन दिया है*।
लेकिन अभी तक आप नहीं आए हैं। आप गांधी विचार से लगाव रखते हैं और हमेशा गलत के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए आपका आना हमारे लिए बहुत महत्व का है।
आपके आने से हम सब का हौसला बढ़ेगा और गलत करने वालों का मनोबल टूटेगा।
इसलिए एक दिन के लिए ही सही, 19 दिसंबर को बनारस आइए*। जरूर आइए।
हमें आपके आने का इंतजार है।
प्रोफेसर आनंद कुमार
चंदन पाल
अरविंद अंजुम
अरविंद कुशवाहा
जागृति राही
नंदलाल मास्टर
रामधीरज
