_______ इसराइल ने CIA व मोसाद के खूफिया सूत्रों के मार्फ़त हमास द्वारा करवाए गए फिलिस्तीन युद्ध में अब युद्ध विराम प्राप्त कर लिया।
________इस युद्ध मे प्रत्येक्ष व अप्रत्यक्ष तौर से केवल ग़जा में ही लगभग 3 लाख लोग मारे गए। मारे गए अधिकांश लोग बेगुनाह ही थे।
नई दिल्ली!
7 अक्टूबर 23 से शुरू हुवे युद्ध मे गजा पूरा शहर तबाह हो गया जिसकी क्षतिपूर्ति करने वाला कोई नही। यहां तक कि क्षतिपूर्ति की बात युद्ध विराम के समय उठाने वाला तक कोई नही था क्योंकि हमास तो क़तर ऑफिस के दिशानिर्देश से चलता रहा और कतर अमेरिका का जरखरीद गुलाम वर्षो से ही है फिर आवाज हमास तो उठाने से रहा व ईरान-रूस, हिज्बुल्ला को आवाज उठाने जैसा अमेरिका ने रखा ही नही।
देखा जाय तो CIA ने हमास से युद्ध शुरू करवाकर एक तरह फिलिस्तीन जनता को पहले ही दिन दुनियाभर में खलनायक बना दिया था क्योंकि इस युद्ध की शुरुआत कतर स्थिति हमास व CIA-मोसाद के सूत्रों ने की थी जिसमे हमास के नेतृत्व को भृमित करके इजराइल पर हमला करवाया गया था अन्यथा भला किसी नेतृत्व को कैसे विश्वास हो कि रॉकेट लांचरों व बन्दूको के भरोसे इजराइल को हराया जा सकता है।
इस युद्ध के शुरू होने से लेकर युद्ध विराम तक एक तरह से अधिकांश इजराइल व अमेरिकी लक्ष्य प्राप्त कर लिए। ईरान बिन बुलावे ही युद्ध मे कूदा जो अमेरिका व इजराइल चाहते थे जिस कारण अपने रेसिस्टेंट की धुरी हिज्बुल्ला की शक्ति को ख़त्म करवा बैठा व दूसरी तरफ सीरिया में अपनी समर्थक असद सरकार का तख्तापलट करवा बैठा तो तीसरी तरफ हुथियो की शक्ति भी ब्रिटन-अमेरिका हमले से कम हुई वही रूस को सीरिया छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा जिससे मध्य पूर्व में उसका प्रभाव व दखल प्रायः नगण्य रह गया।
इस युद्ध से अमेरिका ने सउदी व तुर्की को अपने नजदीक आने पर विवश किया जिससे उनकी ब्रिक्स देशों से दूरियां बढ़ी।
इस युद्ध ने पुनः यह सिद्ध किया कि खाड़ी व अरब क्षेत्रो में अमेरिका ही एक मात्र वैश्विक शक्ति है जो युद्ध करवाता, हथियार बेचता व बेगुनाह जनता को मरवाता है और बाद उनके मध्य सुलह भी वही करवाता है। इजराइल को अमेरिका ने खूब हथियार व धन दिया व फिलिस्तीनों, हमास, हिज्बुल्ला व हुथियो को खूब मरवाया व बाद में युद्ध विराम जब उसी ने करवाया तब ग्रुप ऑफ रेसिस्टेंस व ईरान को कोई पूछने वाला नही रहा।
इस बार भी यह साफ हो गया की खाड़ी व अरब क्षेत्रो में इजराइल व अमेरिका की कूटनीति, गुप्तचरी, रणनीति व कार्यनीति का कोई तोड़ नही और जैसा वे चाहे वैसा करने की कूवत भी उनके पास हैं। इजराइल फिलिस्तीन युद्ध मे रूस व ईरान एक दम बबौने साबित हुवे व चीनी की कूटनीति तेहरान आने से पहले ठंड पी गई। इस बार नेतन्याहू ने जैसा चाहा वैसा सहयोग बाइडन प्रशासन व CIA ने किया।
इस युद्ध की नेतन्याहू के लिए जो बड़ी उपलब्धियां रही उनमें सीरिया में दुश्मन सरकार की जगह सेवक सरकार स्थापित होना, गाजा का खत्म होना व लेबनान हिज्बुल्ला का लगभग खात्मा जहां इजराइल की मैत्री सरकार बनना व ईरान का दुमदबाकर बैठ जाना।
हमारा मानना है कि ईरान चुप भले बैठ जाय मगर वह नेतन्याहू का अगला लक्ष्य है।मोसाद व CIA ईरान को भीतर से तोड़कर तख्तापलट करवाएंगे जिसमे ईरान बड़े ग्रह युद्ध मे फँसेगा।।
(छपते छपते:- कहते है की युद्ध विराम के बाद गाजा में जश्न का माहौल है इसपर यही कहा जा सकता है कि 3 लाख लोग मरवा कर व शहर को जमीदोंज देखकर भी कोई कब्रिस्तान, खण्डहर व मरघट पर खुशी मनावे तो यह समझ लेना चाहिए कि उस जनता की मानसिकता अब आत्महंता प्रवृति की हो चुकी है।)
उत्तर काल काल
भागाराम मेघवाल । Director, The School of International Studies.
