______आवारा पूँजी में अहिर्निश सेवारत फासीवाद का अंतिम लक्ष्य जनता को ही देश में अप्रासंगिक करना होता है।
_______हिटलर से लेकर मोदी तक सभी चुनावी मशीनरी पर क़ब्ज़ा करते हैं.!!
नई दिल्ली
आवारा पूँजी में अहिर्निश सेवारत फासीवाद का अंतिम लक्ष्य जनता को ही देश में अप्रासंगिक करना होता है. इसलिए हिटलर से लेकर मोदी तक सभी चुनावी मशीनरी पर क़ब्ज़ा करते हैं.!!
बुर्जुआ संविधान और न्याय प्रणाली के झीने से आवरण के पीछे, जिन मूलतः जनविरोधी नीतियों को छुपाया जाता है, उन मुखौटों को बेरहमी से फाड़ कर फ़ासिस्ट फेंक देते हैं.!!
इनके बदले वे कुछेक तथाकथित जनकल्याण की योजनाओं को करदाताओं के पैसों से चला कर वाहवाही लूटते हैं और भिखार्थियों का एक बहुत बड़ा वर्ग तैयार करते हैं, जिन्हें वे लाभार्थी कहते हैं.
हरेक चुनाव को धाँधली से अपहरण कर फ़ासिस्ट अपनी जीत का सेहरा, इन्हीं लाभार्थियों के समर्थन के सर पर बाँधते हैं.!!
जाति समीकरण और तथाकथित सोशल इंजीनियरिंग का शिगूफ़ा अलग से छोड़ दिया जाता है.!!
मेन स्ट्रीम मीडिया हो या समानांतर मीडिया हो, कोई भी इस सच्चाई को नहीं दिखाता है, क्योंकि,अंततोगत्वा उनके वर्ग चरित्र के विरुध्द है- फासीवाद का विरोध करना.!!
बाज़ार की जिन शक्तियों के अधीन हो कर ये अपनी दुकानदारी चलाते हैं, वे उन्हें ऐसा करने नहीं देंगी.!!
______ इस विकट परिदृश्य में कम्युनिस्ट क्या करें ?
भारत के संदर्भ में कम्युनिस्ट तभी से चूकते आ रहे हैं, जब नरसिम्हा राव की सरकार ने तथाकथित उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके बहाने श्रम क़ानूनों को शिथिल करने के साथ-साथ, औद्योगिक नीतियों को श्रमिक विरोधी बनाने की शुरुआत की थी.
अस्सी के दशक तक चली हड़तालों की धार, नब्बे के दशक आते आते कुंद पड़ गई थी. इसके पीछे के कारणों की पड़ताल अलग से ज़रूरी है.!!
बहरहाल, आज के हालात में कम्युनिस्ट लोगों को अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय करना होगा.
दूसरे, कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को समझना होगा कि बदले हुए परिवेश में, ट्रेड यूनियन गतिविधियों को सिर्फ़ Organised Sector तक सीमित रखना, आत्मघाती है.!!
वैसे भी नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के चलते, यह क्षेत्र भी सिकुड़ रहा है.!!
भारत की 94% अर्थव्यवस्था Unorganised Sector से जुड़ी है. यानि, सिर्फ़ 6% लोग ही संगठित क्षेत्र, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट, से जुड़े हैं.!!
अब इनमें से अगर Industrial Labour की बात की जाए तो कितने प्रतिशत हुए ?
अगर आप चाहते हैं कि इन मुठ्ठी भर लोगों के सहारे, आप फासीवादी, पूंजीवादी ताक़तों के खिलाफ कोई लड़ाई लड़ सकेंगे, तो आप मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं.!!
आज कम्युनिस्ट पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों और कामगारों को गोलबंद करना है. मसलन, शहरी क्षेत्रों में गिग वर्कर पर ध्यान दीजिए और ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा मज़दूरों पर. ऐसे सैकड़ों सेक्टर हैं!!
क्रांति रुमानियत नहीं है और न ही कोई दिवास्वप्न. इसे घटित करना होता है और सही नेतृत्व और सोच ही इसे साकार करता है.!!!
Subroto Chatterje
