___________ लुंपेन ट्रंप के आने के मायने ??
______ समझिए !!
पहले राजनीति का अपराधीकरण हुआ, फिर अपराधियों का राजनीतिकरण हुआ और अब व्यापारियों का राजनीति करण हो रहा है.!
पूँजीवादी व्यवस्था रातोंरात फासीवादी व्यवस्था नहीं बनती है. एक ऐतिहासिक निरंतरता और मजबूरी होती है.!
मस्क के मंत्री बन जाने के बाद हो सकता है कि भारत जैसे पंगु लोकतंत्र में बहुत जल्द आपको केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों में बेईमान धंधेबाज़ों को देखना पड़े.!
वैसे धुरंधर क्रिमिनल तो पहले से ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण पदों पर क़ाबिज़ हैं.!
शर्मनिरपेक्षता का अमृत काल सिर्फ़ भारत में ही नहीं चल रहा है, बल्कि पूरी पूंजीवादी दुनिया में चल रहा है. !
आम जनता को नंगों की पूजा करने से फ़ुर्सत नहीं है, चाहे वो कुंभ के मेले में हो या राजनीतिक मंचों पर हों.!
जहाँ पर जनता जागरूक है और चुनाव के माध्यम से नंगे क्रिमिनल लोगों को लतिया कर निकालना चाहती है, वहाँ पर नंगा चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोठा तक है उनकी आकांक्षाओं को परास्त करने के लिए.!
बाईडेन ने अपनी विदाई भाषण में जिस Oligarchy या कुलीन तंत्र की तरफ इशारा किया, वह सिर्फ़ तीन हज़ार सुपर रिच के सहारे नहीं चलता है, बल्कि इनको समर्थन देने वाली सरकारी संस्थाओं, न्यायपालिका और मीडिया के सहारे चलती है.!
आने वाले दिनों में संकट और गहरा जाएगा.!
यूरोप इस ख़तरे को भाँप चुका है और इसलिए ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक सभी जगह लोग ट्रंप के खिलाफ हैं, यद्यपि वहाँ की सरकारों की तरफ़ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई हैं.
वैसे देर सबेर अमरीका फर्स्ट की प्रतिक्रिया में जर्मनी फर्स्ट या फ्रांस फर्स्ट का नारा भी आपको सुनाई देने लगे.!
ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि प्रतिक्रिया वादी राजनीति में यही होता है और जब ऐसा होगा तब ट्रंप के लाख कोशिशों के बावजूद दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध से नहीं बचाया जा सकेगा.!
राष्ट्रवाद की अंत्येष्टि युद्ध के मैदान में ही होती है, जैसे कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ.!
न्यू वर्ल्ड ऑर्डर एक पंगु concept है और यह उन देशों और समाजों से निकला है जहां पर एक परिवार के अंदर ही किसी ऑर्डर की कल्पना आप नहीं कर सकते हैं.!
यह दरअसल बाजारवादी शक्तियों के सामूहिक एकाधिकार की एक बेहूदी कोशिश है, जिसे मेहनतकश जनता के अथक प्रयासों से हराना ही होगा.!
