_______ केंद्रीय बजट 2025- कॉरपोरेट, पूंजीपतियों और अमीरों के लिए बनाया गया, गरीब विरोधी बजट ____ डा0 वीजू कृष्णन
_______किसानों, मजदूरों और गरीबों की आजीविका पर हमला करने वाला बजट ___कां, मुकुट सिंह यादव
______ 5 फरवरी, 2025 को पूरे भारत में किया जाएगा विरोध-प्रदर्शन जलाई जाएंगी बजट की प्रतियां
इटावा, उतर प्रदेश !!!
डॉ. वीजू कृष्णन ने उक्त टिप्पणी चाणक्य होटल में प्रेस वार्ता करते हुए आगे कहा कि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट कॉरपोरेट, पूंजीपतियों व अमीरों के लिए बनाया गया है और पूरी तरह से गरीब विरोधी है। भले ही सकल घरेलू उत्पाद में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है, लेकिन कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बजट आवंटन 2024-25 के संशोधित अनुमानों से कम है। जहां 2024-25 का संशोधित अनुमान 376720.41 करोड़ रुपये था, वहां 2025-26 के लिए आवंटन केवल 371687.35 करोड़ रुपये है। जबके मुद्रास्फीति को ध्यान में रखा जाए, तो यह आवंटन में बहुत बड़ी कटौती है। 2020-21 से कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए वास्तविक व्यय में लगातार गिरावट आई है। स्पष्ट रूप से किसान भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने, खरीद का विस्तार करने या किसानों को कर्ज मुक्त करने के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। यहां तक कि लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश को भी अनदेखा कर दिया गया है।
डॉ बीजू कृष्णन ने आगे कहा कि रोजगार में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, यह 2017-18 के 44.1 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 46.1 प्रतिशत हो गई है, जो शहरी क्षेत्रों से रिवर्स माइग्रेशन का संकेत दिखता है क्योंकि रोजगार के अवसर नहीं बचे हैं। बेहद असंवेदनशील तरीके से, मनरेगा के लिए बजट आवंटन सिर्फ 86,000 करोड़ रुपये रखा गया है। ग्रामीण इलाकों में रोजगार सृजन पर कोई जोर नहीं दिया गया है। सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान के लिए सभी फंड रोक रही है और इसके लिए बजट आवंटन कुछ भी नहीं हैय यह ग्रामीण विकास और ग्रामीण गरीबों के प्रति भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की उदासीनता को भी दर्शाता है। खाद्य सब्सिडी के लिए किया गया आवंटन भी 2024-25 से कम है। कल्याणकारी योजनाओं के तहत राज्यध्केंद्र शासित प्रदेशों को दालों के वितरण के लिए आवंटन शून्य है, जबकि पिछले बजट में इस के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बहुप्रचारित, 12 लाख रुपये तक आयकर में छूट का उद्देश्य त्वरित चुनावी लाभ प्राप्त करना है। बढ़ती कीमतें, बढ़े हुए अप्रत्यक्ष करो और लगातार होती खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, यात्रा व्यय में वृद्धि, के कारण इस छूट के कोई मायने नहीं बचेंगे।
सरकार की प्रमुख योजना “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना” के लिए आवंटन में को 15,864 करोड़ रुपये से 12,242.27 करोड़ रुपये कर भारी कटौती की गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं हुई है और इस योजना में 2019 से जब इसे पहली बार शुरू किया गया था, तब से मुद्रास्फीति के लिहाज से कोई समायोजन नहीं किया गया है खाद सब्सिडी को 171298.50 करोड़ रुपये से घटाकर 167887.20 करोड़ रुपये कर दिया गया है, यानी 3,411.30 करोड़ रुपये की कटौती। दालों के लिए आत्मनिर्भर मिशन की छह वर्षीय पहल के लिए मात्र 1000 करोड़ रुपये का कुल आवंटन सरकार के खोखला दावे की पोल खोलता है। विडंबना यह है कि यह दावा उस सरकार की ओर किया गया है जिसने सिर्फ 10 दिन पहले अरहर /तूर के शुल्क मुक्त आयात को बढ़ाया दिया है तथा मोजाम्बिक व अन्य देशों में किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। 2024 में दालों का आयात लगभग दोगुना होकर 60 लाख टन (जनवरी से नवंबर के बीच) हो गया। इस दावे में भी कोई नई बात नहीं है कि एन.ए.एफ.ई.डी और एन.सी.सी.एफ मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अगले 4 वर्षों तक दालों की खरीद करेंगे। यह केवल इस तथ्य को उजागर करता है कि निजी क्षेत्र एमएसपी कीमतों पर खरीदने के लिए तैयार नहीं होगा। धन ध्यान कृषि योजना की घोषणा की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि यह कम पैदावार वाले 100 जिलों को कवर करेगी और 1.7 करोड़ किसानों को लाभान्वित करेगी। लेकिन इसके लिए कोई अलग से आवंटन नहीं किया गया है। यह केवल मौजूदा कार्यक्रमों का ही नवीनीकरण है। रबर के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष या जंगली जानवरों के खतरे को कम करने के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। महासचिव डॉ. बीजू कृष्णन ने एलान किया कि किसान सभा देश भर की इकाइयों से बजट की प्रतियां जलाने और 5 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चे व केंद्रीय ट्रेड यूनियनो के संयुक्त मंच की विरोध कार्यवाहीयो को व्यापक रूप से सफल बनाने का आह्वान करता है।
प्रेस वार्ता में उ.प्र. किसान सभा के महामंत्री मुकुट सिंह, राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज कुमार, माकपा जिला सचिव मंडल सदस्य प्रेमशंकर यादव, डॉ. शौकीन सिंह, डी वाई एफ आई के जिला मंत्री मोनू यादव भी मौजूद रहे।
