_____ साल की आख़िरी शाम….!!
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साल की आख़िरी शाम
उनके नाम का
जो नतायज़ से बेख़ौफ़
लड़ते रहे
जेलें भरते रहे
आग से नफ़रतों की
बचा लाए प्यार
जिनने चोटें सही
फिर भी हँसते रहे
ट
मजूरों के नाम
और किसानों के नाम
अलम थाम चलते जवानों के नाम
लड़कियों और उन औरतों के नाम
जिनकी आँखों से सहमा ज़ालिम निज़ाम
जिनकी पाकीज़ा आँखों से
ख़्वाब छीने गए
उन मासूमों के नाम
जिनके सीनों पर
मज़हब के ख़ंजर चले
जिनकी देहों की क़ीमत पे
वहशी पले
जिनकी दुनिया लुटी
घर जिनके जले
उन मज़लूम बेगुनाहों के नाम
नाम उनके
जिनकी साँसें वबा खा गई
जिनकी रोटी हवा खा गई
घर से निकले तो जो लौट पाए नहीं
फूल ऐसे कि जिनको फ़ज़ा खा गई
कैसे हीरे थे जिनकी चमक मिट गई
रक़्स के बीच हाए धनक मिट गई
राम आए न जिनके
ख़ुदा आए काम
साल की आख़िरी शाम
उन बदनसीबों के नाम….. साल की आखिरी शाम…!!!!
