_______ मारुति सुजुकी के गुरुग्राम-मानेसर कारखानों से निकाले गये मजदूरों के समर्थनमें मासा ने जंतर मंतर पर दिया धरना ..!!
_______ हजारों अस्थायी ठेका, प्रशिक्षु, अपरेंटिस, टीडब्ल्यू, सीडब्ल्यू, एमएसटी आदि श्रमिकों को स्थायी नौकरी, समान वेतन, वेतन वृद्धि की मांगों उठाया
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान के आवाहन पर रविवार को जंतर मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया जिसमें मारुति सुजुकी अस्थायी मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने भाग लेकर मारुति सुजकी और प्रशासन द्बारा किए जा रहे मजदूरों पर अत्याचार की कहानी सुनाते हुए आरपार की लड़ाई का ऐलान किया गया !
देशभर से आए अस्थायी श्रमिकों ने कंपनी में काम करने के अपने अनुभव और उसके बाद बेरोजगारी के संघर्ष की अपनी-अपनी कहानियां साझा कीं। ग्रामीण मजदूर यूनियन के नेता गौरव ने कहा कि पूंजीवादी ताकतों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है वह मजदूरों को स्थाई रोजगार नहीं देना चाहते है। हमें कारखानों के मालिकों के सरकार से भी लड़ना पड़ेगा तभी हम तमाम कुर्बानियों के बाद मिले अधिकार सुरक्षित रख सकेंगे!
सीपीआई-एमएल मास लाइन के दिल्ली एनसीआर राज्य सचिव विमल त्रिवेदी ने कहा कि सारे देश के मजदूर फासीवादी हमलों का शिकार हो रहे हैं। देश में जुझारू आंदोलन के लिए किसानों मजदूरों छात्र नौजवानों के बीच एकता कायम करनी होगी!!
एक मजदूर ने धरना में अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि सात महीने तक मारुति में अस्थायी श्रमिक के रूप में काम करने के बाद कंपनी से निकल दिया गया है। कंपनी नये श्रमिकों को काम पर लगा नही है पुराने श्रमिकों निकाल रही हैं! सरकार कंपनी का साथ दे रही है !
वर्तमान में मारुति सुजुकी गुड़गांव स्थित अपने चार कारखानों में 36,000 श्रमिकों को रोजगार देती है, जिनमें से मात्र 17% स्थायी हैं और बाकी श्रमिक अस्थायी श्रेणियों, जैसे अस्थायी श्रमिक 1 और 2, आकस्मिक श्रमिक, प्रशिक्षु, ठेका श्रमिक और छात्र प्रशिक्षुओं में विभाजित हैं। प्लांट का पूरा उत्पादन अस्थायी श्रमिकों पर निर्भर है, जबकि स्थायी श्रमिकों की भूमिका अधिकांश पर्यवेक्षी कार्यों तक सीमित है। स्थायी और अस्थायी श्रमिकों के वेतन में बड़ी खाई है, जहां स्थायी कर्मचारियों का औसत वेतन 1,30,000 है, वहीं अस्थायी श्रमिकों का वेतन 12,000 से 30,000 रुपये के बीच है। अस्थायी श्रमिकों को केवल सात महीने के लिए नियुक्त किया जाता है। एक अन्य बड़ा हिस्सा छात्र प्रशिक्षु कार्यबल का है, जिन्हें प्रशिक्षुता और आईटीआई शिक्षा के नाम पर मुख्य उत्पादन कार्य में लगाया जाता है, लेकिन दो साल बाद उन्हें एक ऐसा प्रमाणपत्र दिया जाता है जिसका श्रम बाजार में कोई महत्व नहीं होता।
श्रमिकों द्वारा बताया गया कि श्रमिकों ने मौजूदा तीन कारखानों में 30,000 स्थायी पद सृजित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि इन सभी पदों पर और सोनीपत के खरखौदा में प्रस्तावित नए प्लांट के पदों पर केवल उन्ही लोगों नियुक्ति की जाए, जिन्होंने किसी भी मारुति प्लांट में अस्थायी श्रमिक के रूप में काम किया हो। इसके अलावा, सभी अस्थायी श्रमिकों के लिए 40% वेतन वृद्धि और स्थायी व अस्थायी श्रमिकों के वेतन में अंतर के बराबर की एक ‘क्लियरेंस राशि’ दिए जाने की मांग की गई है, जो उनके कंपनी में काम करने के प्रत्येक महीने के लिए लागू हो। कंपनी द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण प्रक्रिया को लेकर, श्रमिकों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की कि कंपनी द्वारा नियुक्त छात्र प्रशिक्षु वास्तव में कौशल वृद्धि कर सकें और उन्हें उत्पादन प्रक्रिया में श्रमिकों के रूप में न लगाया जाए।
इस अवसर पर टीयूसीआई,इफ्टा (सर्वहारा
) इंकलाबी मजदूर संघ.सीएसटीयू, ग्रामीण मजदूर यूनियन समेत एक दर्जन से अधिक मजदूर संगघनों ने भाग लिया! !
