____ पाला बदलते ही साफ हुआ नेताओं का दामन इंटेलिजेंस ब्योरो आईबी का असली चेहरा हो रहा बेनकाब …!!!
नई दिल्ली. ..!!
कन्हैया कुमार, शहला राशिद से लेकर हार्दिक पटेल इत्यादि पर अलग–अलग बातों पर राजद्रोह, देशद्रोह के केस दर्ज हुए थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने कन्हैया कुमार पर जबतक अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमें कहा गया था कि केस जल्दबाजी में किया गया, तबतक देर हो चुकी थी।
ऐसा स्पष्ट दिखता है कि जेएनयू को बदनाम करने की पटकथा बैठकर लिखी गई हो। एबीवीपी और जी न्यूज का इस पटकथा को अमलीजामा पहनाने में बड़ा सहयोग रहा। पूरे देश को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष ढंग से इसमें इंवॉल्व किया गया था और मकसद भी पूरा हुआ।
देशद्रोह का परिणाम जानते हैं आप? इत्तेफ़ाक देखिए कि यह तमाम युवा नेता आज देश की अलग–अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़ते रहे हैं लेकिन सभी का मुकदमा वापस लिया गया। अब या तो मुकदमा राजनीति की वजह से दर्ज हुआ या फिर वापस लेना राजनीति है?
मेरे लेखनी के जीवन की यह पहली घटना है जब मैंने किसी संवेदनशील मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए और मेरे इर्द–समझदार समझे जाने वाले लोगों और मेरे बीच तब एक रेखा खींची गई थी जो निरंतर विचारधाराओं के रूप में उभरकर सामने आई और फिर चलती गई।
कारण यह कि मैं तब किसी की विचारधारा अधिक नहीं समझता था लेकिन मैं छात्र संघर्ष और आरोप–प्रत्यारोप समझता था। मैं कई प्रमाणों को समझने के बाद जान गया था कि यह एक कैंपस का गुटबाजी वाला मामला है। अफसोस तब हुआ जब पूरा देश इन्वॉल्व हुआ।
अधिक चिंता तब हुई जब रिटायर्ड लोग, शिक्षित लोग, और पक्ष, विपक्ष के लोग बिना तथ्यों के इस हदतक निर्णायक हो गए जो वास्तविक स्थिति में भी नहीं होना चाहिए था। डॉक्टरेट वीडियो, झूठी खबरों के आधार पर ऐसा हुआ और यहीं से आईटी सेल का कारोबार बढ़ा।
आज वह सभी गुट फुल ऑन राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन समाज में अभी भी विचारधाराओं की तलवारें खींची हुई है। संभव है आज भी इस गुटबाजी में आपका कोई पक्ष हो लेकिन वास्तविकता यह है कि जिस बड़े विचार को बड़ा लाभ हुआ, यह पटकथा उनकी ही थी…!!!
