_______ इस दुनिया के बाजार में__रुपया गिरा रे…..!!
___इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
पहला साल गुजारा देखो, नहीं पटाखे दागे।
पर प्रचार में दौड़े इतना, रहे सदा ही आगे।
बढ़ा दिये बेरोजगार, तब लोग रहे सब सोये।
नोट बन्द कर झटक दिये, तो फिरते खोये खोये।
पेंशन बन्द करा दी देखो, कैसा फूल खिला रे।
इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
दिशाहीन हो दौड़ीं सड़कें, झूठ खूब फैलाया।
जरा इशारा पा कर ही, सबने उत्पात मचाया।
सब्सीडी खा गये गैस की, दफ्तर बड़े बनाये।
मणिपुर में कर दिया तमाशा, जरा नहीं शरमाये।
पुलवामा में किया धमाका, कुछ तो मिला रे।
इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
संस्थान सब प्राइवेट कर, हाण्डी खूब चढ़ाई।
बिना परीक्षा हर विभाग में, भर डाले सौदाई।
बदलेगा जब वक्त इन्हें भी, धक्के खाने होंगे।
बदला लेने भर के तब तो, क़ई बहाने होंगे।
अमरीका ने पोल खोल दी, सब तो हिला रे।
इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
गारंटी की हुयी घोषणा, सब का मन ललचाया।
नाम बदलने भर से देखो, क्या इतिहास बनाया ?
चित्र लिये हैं सभी धम्म से, गढ़ कर लिखी कहानी।
इसीलिये तो फिर से अपनी, चाह रहे मनमानी।
हुआ खजाना खत्म बचा न, कोई जिला रे।
इस दुनिया के बाजार में, रुपया गिरा रे।
___मदन लाल अनंग…!!____ मो. न. 9450155040
