___ विभिन्नता में एकता का प्रतीक हमारा जनपद हमारा गौरव…!!
……………
मैनपुरी उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जनपद है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व और आपसी भाईचारा साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। जनपद में राष्ट्रीय एकता का अभेध्य गढ़ माना जाता है। देश के बंटवारे के बाद से आज तक मैनपुरी में कोई ऐसा दंगा फसाद नहीं हुआ है जिससे आपसी भाईचारा सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ा हो 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरे जाने के बाद सारे देश में दंगा फसाद हुआ लेकिन जनपद वासियों ने शांति कायम रखकर जो राष्ट्रीय एकता की मिसाल पेश वह जनपद वासियों के लिए गौरव की बात है!
मैनपुरी में आपसी भाईचारे की कई मिशालें देखी जा सकती हैं जिले में विभिन्न समुदायों के लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं। सामुदायिक कार्यक्रमों में सभी समुदायों के लोग भाग लेते हैं। जिले में सामाजिक समरसता की भावना मजबूत इतनी मजबूत है कि सामाजिक सासंकृतिक कार्यक्रमों में सभी समुदायों के लोग बिना भेदभाव के आपस में मिलकर भागेदारी करते हैं! जनपद की यह शानदार परम्पराऐं आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की भावना को दर्शाती हैं!
हमारा जनपद सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व के मामले में भी विशिष्ट पहचान रखता है शिशुपाल शिशु और रंग जी से लेकर रामावतार शशि हरिशंकर अविरल तक का सफर सांस्कृतिक और साहित्यिक सद्भाव पर आधारित रहा है साहित्य लेखन की प्रक्रिया आपसी भाईचारे को मजबूत करने और शोषण पीड़ित अवाम को उसका हक दिलाने के लिए प्रेरित करने वाली रही है! युवा पीढ़ी में कई एक साहित्यकार जिले को पहचान देने के लिए एकता पर आधारित कल और परिस्थितियों बराबर लेखन कर रही हैं।
जनपद की लोक कला और लोक भाषा बहुत समृद्ध हैं पारंपरिक नृत्य जैसे कि कुम्हार नृत्य और ढोल नृत्य प्रसिद्ध और
लोक संगीत और पारंपरिक वाद्यों का उपयोग जनपद की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। जिले विभिन्न हिस्सों में ब्रज भाषा के साथ खड़ी और अवधी भाषा बोली जाती है, जो एक प्राचीन और समृद्ध भाषा है। जिसके बोलने पर आपस में मिलियन और प्रेम वातावरण बनता है सभी समुदायों के बीच इसी भाषा में बातचीत के साथ-साथ विभिन्न तरह के सासंकृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है
मैनपुरी की लोककथाएं और लोकगीत इसकी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मैनपुरी की लोक कला और लोक भाषा इसकी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं। हमारी भाषा ही विविधताएं बोलचाल के तरीके रहन-सहन खानपान आदि विविधताएं भी विविधिता में एकता का प्रतीक हैं। जो बिना भेदभाव के हम सभी समुदायों के लोगों को एकता के सूत्र बांधकर रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
जनपद में कोई बड़ा उद्योग न होने के कारण आम लोगों की आजीविका का साधन प्रमुख रूप से कृषि हैं। चारों ऋतुओं से संपन्न जनपद वासी रवी के मौसम में गेहूं और आलू खरीफ के मौसम में धान मक्का और बाजार की फसल उगते हैं जबकि जायद की फसल में मौसम पर आधारित फल सब्जियां भी पैदा करते हैं फूलों की खेती भी जनपद में की जाती है उद्योग हीनता के कारण पढ़े-लिखे नौजवानों को भी रोजगार पाने के लिए अन्य जनपदों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है ! कृषि उपज पर आधारित उद्योग लगाने की बहुत पुरानी मांग जनपद वासियों की आज तक अधूरी है!
श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी हमारे जनपद की सांस्कृतिक साहित्यिक और सामाजिक एकता के साथ धार्मिक अनुष्ठान वैचानिक और कृषि पर आधारित आयोजनों का जनपद स्तरीय ऐतिहासिक महत्व का मंच है जिस मंच पर नवोदित प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने इसका संरक्षण करना जनपद वासियों का दायित्व है। विभिन्नता में एकता समेटे हमारा जनपद हमारा गौरव है।
…………… राकेश रागी
कवि एवं साहित्यकार. स्वतंत्र पत्रकार
( खटिकपुर, मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
