_______पाकिस्तान मज़हब देखकर नहीं, ‘हिंदुस्तानी’ देखकर हमला कर रहा है….!!
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_____”पाकिस्तान की तरफ़ से हुए हालिया हमलों में Poonch और Kathua जैसे इलाकों में सबसे ज़्यादा नुकसान मुसलमानों को ही हुआ. *वहां 90% से ज़्यादा मारे गए लोग मुसलमान है…!!
इससे ये साफ़ होता है कि पाकिस्तान मज़हब देखकर नहीं, ‘हिंदुस्तानी’ देखकर हमला कर रहा है….!!
_____लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि अपने ही मुल्क में मुसलमान को ‘मुसलमान’ होने की सज़ा मिलती है, — उस पर शक की नज़रों से देखा जाता है, और बार-बार वफ़ादारी साबित करने की ज़रूरत पड़ती है!
____मुल्क में चाहे जितने भी ज़ुबैर हो जाएं, चाहे कितनी भी सोफ़िया कुरैशी अफ़सर बन जाएं, एक आम मुसलमान की औक़ात वही रह जाती है —शक और सफ़ाई के बीच झूलती हुई!
___आज भी जब कोई मुसलमान जंग के ख़िलाफ़ कुछ कहता है, तो वो डरता है कि कहीं उसे पाकिस्तान समर्थक ना समझ लिया जाए!
____हर पोस्ट की शुरुआत वो सफ़ाई से करता है — “हम भारत के साथ हैं”, और फिर कहता है — “हमें जंग नहीं चाहिए!”….!!
____असलियत ये है कि मुसलमान पाकिस्तान से लड़ने से पहले इस देश की आज़ादी की लड़ाई में भी कंधे से कंधा मिलाकर लड़ा था. उसने तब भी इस मिट्टी को अपना घर माना था, आज भी मानता है और कल भी मानेगा….!!
___ मगर सवाल आज भी वहीं का वहीं है…!!
_______उसे हर बार अपने मुल्क से मोहब्बत और अपनी वफ़ादारी क्यों साबित करनी पड़ती है?”
