______ स्टारलिंक के भारत में प्रवेश का विरोध करो : माकपा..!!
____ स्टारलिंक का विरोध क्यों करे आइए जानते है इस लेख को पढ़कर सच क्या है क्यों छिपाया जा रहा है..!!
नई दिल्ली. .!!
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलिट ब्यूरो ने स्टारलिंक के भारत में प्रवेश की इजाजत दिए जाने पर विरोध जताया है । माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा है कि स्टारलिंक को हमारे देश में काम करने के लिए जिस तरह इजाजत दी गयी है , उसकी पूरी प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है । स्टारलिंक एक विदेशी कारपोरेशन है और भारत का महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विदेशी हाथों में सौंपे जाने के गंभीर सुरक्षा संबंधी निहितार्थ हैं । यह अमरीकी एजेंसियों को हमारी दूरसंचार प्रणाली में और यहां तक कि हमारे रणनीतिक संचार में भी प्रवेश के लिए चोर दरवाजा मुहैया करा देता है । एक बार जब स्टारलिंक को सैटेलाइट उपग्रहों की , खासतौर पर लो अर्थ आर्बिट स्पॉटों की संख्या आवंटित कर दी जाती है , उन्हें पुन: वापस नहीं लिया जा सकेगा । यह हमारे दुर्लभ अंतरिक्ष संसाधन विदेशी एंटिटियों को सौंपना और इस प्रक्रिया में हमारे देश के हितों को कुर्बान करना है ।
माकपा का मानना है कि अगर सरकार की सचमुच देश की आत्मनिर्भर क्षमताओं के विकास में दिलचस्पी है , तो वह इसरो की सेवाओं का उपयोग कर सकती थी । भारत , खासतौर पर डॉट , सी-डॉट के पास , सेटकॉम क्षेत्र के लिए आवश्यक उपकरण मुहैया कराने की सामर्थ्य है । इन कदमों ने भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत किया होता और हमारी सुरक्षा तथा डिजिटल संप्रभुता की भी हिफाजत की होती ।
माकपा के मत में यह पूरी डील ही रहस्य के पर्दे में लिपटी हुई है । बताया जाता है कि ट्राई द्वारा सिर्फ 4 फीसद स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क लिया जा रहा है और वह सीधे-सीधे कोई फीस नहीं लेने जा रहा है । इसके चलते हमारे खजाने का भारी नुकसान होगा और यह हमारे हितों के लिए नुकसानदेह होगा । यहां तक कि भारतीय अंतरिक्ष नियमनकर्ता , एन-स्पेस से अनुमति का दर्जा तथा विवरण भी , अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं ।
स्टारलिंक के प्रवेश और अंबानी के रिलायंस जियो तथा मित्तल के भारती एटरटेल के साथ उसकी साझेदारी से करीब-करीब द्वि-इजारेदारी पैदा होने जा रही है , जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी , बीएसएनएल के लिए प्रतियोगिता में रहना बहुत मुश्किल हो जाएगा । यह सरकार की ओर से इसकी एक और कोशिश होगी कि बीएसएनएल को , जो करीब-करीब देश के सभी हिस्सों में सस्ती दूरसंचार तथा इंटरनैट सेवाएं मुहैया कराता है , खत्म कर दिया जाए ।
स्टारलिंग के काम-काज की इजाजत देने से दीर्घावधि में देश के हितों का नुकसान होने जा रहा है । सीपीआइ (एम) मांग करती है कि सरकार फौरन अपने फैसले को वापस ले ।
