______ इजराइल और अमेरिका की रणनीति — पहले बम छीनो फिर सत्ता की नींव हिलाओ…!!
_______इजरायली हमला ईरान को तकनीकी रूप से परमाणु बम से कई साल पीछे धकेल देना…!!
____ दूसरा लक्ष्य — मिसाइल और ड्रोन के जाल को कमजोर करना…!!
नई दिल्ली. ..!!
आज इजराइल और अमेरिका जिस खामोश लेकिन घातक युद्ध को अंजाम दे रहे हैं, उसका मूल उद्देश्य सिर्फ मिसाइल गिराना नहीं है बल्कि ईरान के भविष्य को अंदर से बदल देना है। सार्वजनिक बयानों में दोनों यही कहते हैं कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोका जाएगा लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह पूरा अभियान तीन परतों में बँटा है — बम, ताक़त और सत्ता….!!
______ पहला लक्ष्य — परमाणु क्षमता को तबाह करना….!!
ईरान की असली ताक़त उसके यूरेनियम संवर्धन संयंत्र हैं। नतान्ज़, फोर्दो और इस्फहान जैसी साइटें रातों-रात नहीं बनीं। इनके आसपास सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि ड्रोन या सर्जिकल स्ट्राइक के बिना इन्हें निष्क्रिय करना असंभव है। इजराइल ने Mossad की मदद से वैज्ञानिकों की टारगेट किलिंग से लेकर संवर्धन मशीनों पर सायबर अटैक तक हर तरीका आजमाया। अब जब खतरा दुगुना हो गया है, तो सीधे बंकरों पर बम बरसाने का रास्ता खुल गया है। लक्ष्य साफ है — ईरान को तकनीकी रूप से परमाणु बम से कई साल पीछे धकेल देना…!!
____ दूसरा लक्ष्य — मिसाइल और ड्रोन जाल को कमजोर करना…!!
ईरान के पास हज़ारों छोटी और मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं। यह वही ताक़त है जिससे वह इजराइल, सऊदी और बाकी खाड़ी देशों को पलटवार की धमकी देता है। इस नेटवर्क को कमज़ोर करना उतना ही जरूरी है जितना परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना। इजराइल ने हाल के हमलों में पनडुब्बियों से लेकर स्पेशल ऑप्स ड्रोन का इस्तेमाल कर इन भंडारगृहों को निशाना बनाया। अमेरिका अपनी नौसेना और रडार कवरेज से इस अभियान को कवर कर रहा है। पूरा मकसद यही कि ईरान के पास missile rain का विकल्प धीरे-धीरे खत्म हो जाए…!!
_____ तीसरा और सबसे गुप्त लक्ष्य — सत्ता के अंदर दीमक लगाना..!!
यह वह परत है जो दुनिया को भाषणों में नहीं दिखाई देती। ईरान की इस्लामिक सत्ता का सबसे मजबूत आधार उसकी वैचारिक वैधता है। लोग मानते हैं कि ईरान दुनिया भर के मुसलमानों का रक्षक है। पर जब इसी देश के रिफाइनरी जलेंगे, शहरों पर हमला होगा, बिजली और तेल की किल्लत होगी तो जनता पूछेगी कि आखिर यह जंग किसके लिए है। आर्थिक प्रतिबंध, तेल पाइपलाइन के हमले और सामाजिक असंतोष — यह त्रिकोण ईरान की मौजूदा सत्ता के लिए धीमा ज़हर है। अमेरिका और इजराइल जानते हैं कि जनता जब सड़कों पर उतरेगी तो कोई बाहरी सेना नहीं, बल्कि अंदर का गुस्सा सत्ता बदल देगा…!!
______इस सबका फायदा किसे है….!!
सऊदी और यूएई जैसे खाड़ी देश हमेशा से ईरान के बढ़ते प्रभाव से घबराते रहे हैं। उनके लिए यह सुनहरा मौका है कि बिना खून बहाए उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी कमज़ोर हो। रूस और चीन भी इस जाल में उलझेंगे क्योंकि ईरान उनके लिए ऊर्जा और भूगोल का बड़ा सहारा है। इजराइल और अमेरिका दरअसल सिर्फ बम गिरा रहे हैं ऐसा नहीं, वे ईरान के इर्द-गिर्द फैले रूस-चीन के नेटवर्क को भी दरका रहे हैं…!!
____अंतिम पाठ”…!!
इजराइल और अमेरिका का असली गेमप्लान यही है — पहले ईरान से उसका परमाणु कार्ड छीना जाए, फिर उसके मिसाइल और ड्रोन जाल को जड़ से काटा जाए और आखिर में उसकी जनता को सवाल पूछने पर मजबूर किया जाए कि यह इस्लामी गणराज्य किस हद तक सही है। यह युद्ध सिर्फ रणभूमि में नहीं लड़ा जा रहा, यह ईरान के दिल और दिमाग में लड़ा जा रहा है। यही है इजराइल और अमेरिका की गुप्त पटकथा — बम से ज्यादा भरोसे को उड़ाना..!!
______”’Gyanendra Awasthi..!!
