____ फासीवादी ताकत, कथित “हिन्दू राष्ट्र” की स्थापना के
लक्ष्य को हासिल करने को , भारतीय राज्य के धर्म निरपेक्ष चरित्र को ख़त्म करने की रच रही शाजिश. ..!!
___ विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) कमजोर तबकों के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित का सडंयत्र नहीं होगा कामयाब. .!!
____ “विश्व गुरु” के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तमाम दावों के बावजूद, किसान मजदूर छात्र नौजवान परेशान ..!!
खम्मम / तेलंगाना. .!!
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) मास लाइन के केन्द्रीय कमेटी की बैठक 29 से 31 अगस्त तक तेलंगाना के खम्मम में हुई, जिसमें आरएसएस-भाजपा के चौतरफा आक्रामक फासीवादी को लेकर गहरी चिन्ता व्यक्त की गई और कड़ा विरोध जताया गया। यह फासीवादी ताकत, कथित “हिन्दू राष्ट्र” की स्थापना के अपने अंतिम लक्ष्य को हासिल करने के लिए, भारतीय राज्य के धर्म निरपेक्ष चरित्र को खत्म करने में लगी हुई है, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हमारे स्वतंत्रता संग्राम की देन है। वे भारतीय संघ के संघीय चरित्र खत्म करने और इसे केंद्रीकृत एकात्मक राज्य में बदलने का प्रयास कर रहे हैं और संसदीय लोकतंत्र के स्थान पर नंगी आतंकी तानाशाही लागू करने की कोशिश कर रहे हैं..!!
विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर, वे वोटरों की एक बड़ी आबादी, हमारे समाज के कमजोर तबकों को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं। साफ-सुथरी सरकार के बहाने उन्होंने 130वां संविधान संशोधन पेश किया है, जिसका एकमात्र मकसद है विपक्षी दलों के सरकारों को सत्ता से बाहर करना। मजदूर वर्ग, किसानों, महिलाओं, छात्रों, नौजवानों, मुस्लिमों, ईसाइयों, दलितों और आदिवासियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। विरोध के स्वरों को कुचलने के लिए, वे पत्रकारों पर राजद्रोह का आरोप लगाकर हमला कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि आरएसएस-भाजपा द्वारा विपक्षी दलों के उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार श्री सुदर्शन रेड्डी पर झूठे आरोप लगाया जा रहा है…!!
आज आरएसएस-भाजपा के फासीवादी हमले का एक मुख्य केंद्र सम्पूर्ण दक्षिण भारत है।वे राज्यपालों का इस्तेमाल कर रहे हैं, दक्षिण से सांसदों की संख्या कम करने के लिए सीटों के पुनः सीमांकन को हथियार के बतौर प्रयोग कर रहे हैं, हिन्दी थोपने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच राजस्व बंटवारे के स्थापित वित्तीय नीतियों को धत्ता बता रहे हैं। एक वाक्य में, यह संघीय प्रणाली पर चौतरफा हमला है..!!!
जब मोदी सरकार भारत की जनता इतनी निष्ठुर तरीके से हमला कर रही है, उसी समय पर, “विश्व गुरु” और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तमाम दावों के बावजूद, यह सरकार भारतीय जनता के, विशेष रूप से किसानों और लघु व मध्यम उद्योगों के हितों को समर्पित कर रही है। अमेरिकी कपास पर आयात शुल्क को पुरी तरह हटा लेना और इसकी समय सीमा को 30 सितम्बर से बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2025 करना कपास उत्पादक किसानों के लिए खतरे की घंटी है..!!
भाकपा (माले) मास लाइन के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड प्रदीप सिंह ठाकुर ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि इस गंभीर परिस्थिति में, हमारी पार्टी ने तेलंगाना में स्थानीय निकायों के चुनाव के तुरंत बाद, हैदराबाद में एक अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजन करने का निर्णय लिया है। हमारे संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की सोच पर आरएसएस-भाजपा के इन हमलों का विरोध करने तथा हमारे संविधान की भूमिका में निहित हमारे देश संघीय, धर्म निरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के चरित्र की रक्षा करने के उद्देश्य से यह कन्वेंशन आयोजित किया जाएगा। देशव्यापी जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए हम इस कन्वेंशन में कम्युनिस्ट क्रान्तिकारी और वाम जनवादी ताकतों के साथ एकजुट होंगे…!!!
___केंद्रीय कमेटी__ भाकपा (माले) मास लाइन…!!
_______ 31 अगस्त 2025, खम्मम
