मन की पीड़ा….. उदय प्रताप सिंह
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भिक्षा जैसी रोटी खाते आधे हिन्दुस्तानी लोग .!!
फिर भी अपनी पूंजी पर इतराते हैं अभिमानी लोग .!
तिकड़म के बल पर चुनाव में करते बेईमानी लोग ..!
देश प्रेम का समझ न पाए , शायद,असली मानी लोग..!
लागत से कम दाम पर करते खेती और किसानी लोग .!
इसे भाग्य का खेल बता कर करते हैं शैतानी लोग .!
ऊंची कुर्सी पर बैठे जो करते हैं मनमानी लोग .!
काश सोचते सरहद पर कितनी देते क़ुर्बानी लोग .!
देशप्रेम के छद्म भेष में करते है मन मानी लोग .!
स्वर्गलोक में रोते होंगे स्वतन्त्रता सैनानी लोग..!
दिखारहे है संस्कृति की हमको तस्वीर पुरानी,लोग ..!
घुमाफिरा कर छिपा रहे है,अपनी कारिश्तानी लोग .!
संसद में दिखलावे को दिखलाते हैं हैरानी लोग..!
ऐसे कैसे महिलाओं से करते हैं हैवानी लोग ..!
सुबह कई टीवी पर सुनवाते हैं अमृत वाणी लोग..!
आँखे बंद किये रहते हैं लेकिन ज्ञानी ध्यानी लोग..!
