संयुक्त किसान मोर्चा का आह्वान
______ शहीद ए आजम भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के शहीदी दिवस 23 मार्च को “लोकतंत्र बचाओ दिवस” के रूप में मनाएं
साथियो,
हमारे देश को ब्रिटिश साम्राज्य से आजाद करवाने में जो अनगिनत कुर्बानियां दी गई उनमें अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को घर-घर में जाना जाता है। ये तीनों शहीद से आज भी हमें इंकलाब की प्रेरणा देते हैं।
93 वर्ष पूर्व 23 मार्च 1931 को उन्हें अंग्रेजों ने फांसी दी थी। उन्हें याद करते हुए हम कभी नहीं भूलते कि उनका लक्ष्य पूंजिपति राज की बजाय कमेरे वर्गों का राज स्थापित करने वाली क्रांति लाना था। एक ऐसा सिस्टम जहां आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, भाषा, जाति, लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के शोषण व भेदभाव की अनुमति नहीं हो।
ऐसे महान शहीदों और किसान- मजदूरों के कठिन संघर्षों से हमें जो आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार व मूल्यबोध प्राप्त हुए थे, गत 75 सालों से उन्हें एक पर एक नष्ट किया जा रहा है।
पिछले 10 सालों में तो हद कर दी। कॉरपोरेट – पूंजीपतियों के साथ भाजपा शासन अपराधतंत्र और सांप्रदायिकता के भ्रष्ट गठजोड़ के रूप में देश को बर्बादी के कगार पर ले आया है। आर्थिक गैर – बराबरी का आलम यह है कि किसान- मजदूर कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर रहे हैं । करोड़ों युवा रोजगार के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। दूसरी तरफ मुट्ठी भर बड़े पूंजीपतियों को राष्ट्रीय संपत्तियों के बड़े हिस्से पर कब्जा करने की छूट दे दी गई है। बदले में वे भाजपा को चुनावी बौंड के बहाने जिस तरह चोर दरवाजे से अरबों रु देते रहे हैं, उसका भंडार फोड़ हो चुका है। कृषि क्षेत्र को भी कारपोरेट के हाथों में सौंपने के षड्यंत्र हो रहे हैं जिसके खिलाफ देश का संयुक्त किसान मोर्चा शक्तिशाली आंदोलन कर रहा है।
लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्ष सोच और जन आंदोलन की एकता को खत्म करके देश में तानाशाही शासन थोपा जा रहा है। जनता के बीच सांप्रदायिक और जात-पात की नफरत फैला कर भाजपा शासन अंग्रेजों की तरह “फूट डालो– राज करो” की नीति पर चल रहा है।
क्या भगत सिंह और हमारे सभी शहीदों ने इसीलिए अपने जीवन की कुर्बानियां दी थी?
आज हम सब का कर्तव्य बनता है कि देश में संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजी- रोटी पर जो हमले हो रहे हैं, उन्हें विफल करने के लिए भाजपा को गांव- मोहल्लों से अलग थलग करके किसानों-मजदूरों, कर्मचारियों, छात्र- युवाओं , महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का सबक सिखाया जाए, उसे कड़ी सजा दी जाए।
सभी तबके मिल कर 23 मार्च के शहीदी दिवस को गांव-गांव में “लोकतंत्र बचाओ दिवस” के रूप में मनाते हुए देश में इस नाजुक मोड़ पर बुनियादी बदलाव करने का संकल्प लें।
