_____इजरायली हमला और फिलिस्तीनी जनता के नरसंहार के विरोध देश में एकता कायम करो
____ फिलिस्तीनी जनता के स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के अधिकार का सीपीआईएमएल मास लाइन करगी समर्थन
______ 6 जुलाई को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय दिया जायेगा धरना _______ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
______________फिलिस्तीन का 1948 से ही उत्पीड़न हो रहा है । आज इजरायल द्वारा वहां किया जा रहा हमला भयानक है । गाजा में पिछले आठ महीनों से लगातार बमबारी हो रही है । फिलिस्तीन के लोग मिस्र से लगने वाली सीमा राफाह की ओर भाग रहे हैं, जहां से उनके बच निकलने का मौका है । लगभग 15 लाख लोग राफाह में जमा हो गए हैं । लेकिन राफाह को भी बमबारी से मलबे में तब्दील कर दिया गया है । भोजन तो दुर्लभ है ही, दवा और पीने का पानी भी मुश्किल से मिल पा रहा है । इजरायल ने राफाह या किसी अन्य रास्ते से गाजा में मानवीय सहायता की पहंुच को रोक रखा है ।
22 जून 2024 तक 37396 फिलिस्तीनियों के मारे जाने की सूचना है । इनमें से 70 प्रतिशत बच्चे और महिलाएं हैं । इजराइल के हवाई हमलों से बेकरी, मिल और खाद्य भण्डार जैसे बुनियादी खाद्य ढाँचे को तहस-नहस हो गए हैं और मदद पहुंचने के रास्तों की नाकाबंदी के कारण आवश्यक चीजों की आपूर्ति की बेहद कम हो गई है । इससे लाखों गाजावासी भुखमरी का शिकार हैं । यह गाजा पट्टी में व्यापक मानवीय संकट का हिस्सा है । यह आईपीसी पैमाने पर दर्ज की गई ‘‘भयावह भूख का सामना करने वाले लोगों की सबसे अधिक संख्या’’ है, और ऐसा माना जा रहा है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानव निर्मित सबसे भीषण अकाल है ।
फिलिस्तीन का इतिहास भयावह है । 1917 की बाल्फोर घोषणा और उस समय की ब्रिटेन और फ्रान्स के बीच हुई साइक्स-पिकॉट संधि ने यहूदी मातृभूमि की जायोनवादी मांग मान ली गई थी और पवित्र तीर्थस्थलों के आधार पर इसे फिलिस्तीन में स्थापित किया गया था । जबकि उस समय फिलिस्तीन ब्रिटेन या फ्रान्स में से किसी के अधिन नहीं था । जर्मनी में यहूदियों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार और हत्या की पृष्ठभूमि में, जब यहूदियों के झुण्ड ने फिलिस्तीन के कुछ हिस्सों पर जबरन कब्जा कर लिया और फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल दिया, तो सभी देशों ने इसे स्वीकार कर लिया था । लेकिन जायोनीवादी इतने से ही संतुष्ट नहीं थे । वे और अधिक चाहते थे । इजराइल द्वारा विभिन्न युद्धों में अधिक से अधिक भूमि हड़पी गई और फिलिस्तीनियों को दूसरे दर्जे के नागरिक बना दिया गया । उन्हें बिना किसी अधिकार के छोटे-छोटे इलाकों में रहने के लिए मजबूर किया गया । यहां तक कि उन्हें हर दिन काम पर जाने के लिए भी विशेष परमिट प्राप्त करने पड़ते हैं । उन्हें इजराइल में यूनियनों का सदस्य बनने की भी अनुमति नहीं है ।
मोदी सरकार की भूमिका ः भारत सरकार फिलिस्तीन के मुद्दे का समर्थन करने के अपने पुराने रुख से हट गई है। अब यह नेतन्याहू सरकार का विभिन्न तरीकों से समर्थन कर रही है – कूटनीतिक रूप से, सैन्य रूप से और यहां तक कि बेरोजगार युवाओं को मजदूर के रूप में वहां भेज रही है। मोदी सरकार का यह रुख अस्वीकार्य है ।
दुनिया की जनता फिलिस्तीनियों के साथ खड़ी है, अमेरिका अलग-थलग पड़ गया है ः संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्ध विराम का आह्वान किया है । अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ने भी । हालांकि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के स्वतंत्र राज्य की सदस्यता पर वीटो लगा दिया है, लेकिन महासभा ने इसे पर्यवेक्षक के रूप में शामिल करने की अनुमति देने के लिए भारी मतदान किया (9 के मुकाबले 143 और 25 ने मतदान में भाग नहीं लिया) । इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू ने ‘‘हमास के खत्म होने तक’’ फिलिस्तीन पर बमबारी जारी रखने का ऐलान किया है, लेकिन विश्व समुदाय फिलिस्तीनी जनता के साथ खड़ा है । हम भारत की मेहनतकश जनता से भी फिलिस्तीनी जनता का समर्थन करने के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान करते हैं । भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी-लेनिनवादी) मास लाइन ने 6 जुलाई को पूरे भारत में फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में विरोध दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है ।
मांग
______ अमेरिका और अन्य पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियां इजरायल को समर्थन करना बन्द करें ।
_______ भारत सरकार, जायोनवादी इजरायल के साथ सभी रिश्ते समाप्त करे ।
_______ इजरायल, फिलिस्तीन में सभी हमलावर कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाए ।
इजरायल अपने सशस्त्र बलों को 1967 की सीमाओं पर तुरंत वापस भेजे ।
_______ राफाह, गाजा तथा फिलिस्तीन के बाकी हिस्सों में मानवीय सहायता की अनुमति दी जाए ।
______ गाजा के पुनर्निर्माण के लिए संयुक्त राष्ट्र की बहुवर्षीय योजना को तत्काल लागू किया जाए ।
__________________________ भाकपा (माले) मास लाइन