_____कामरेड हरकिशन सिंह को क्रांतिकारी लाल सलाम
_________ कामरेड हरकिशन सिंह अमर रहें, इंकलाब ज़िंदाबाद
लंदन तोड़ के नाम से विख्यात भारतीय सरजमीं पर वामपंथ की रीड कहे जाने वाले कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत की आज पुण्यतिथि है इस अवसर पर हम उन्हें क्रांतिकारी लाल सलाम पेश करते हैं ?✊?
*क्या नाम है तुम्हारा अंग्रेज जज ने पूछा, निर्भीक बालक ने जवाब दिया लंदन तोड़ सिंह यह बालक हरकिशन सिंह सुरजीत थे।*
भारतीय राजनीति के चाणक्य
आज ही के दिन हमारे बीच से चले गए कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत
कम्युनिस्ट मरते नहीं विचार के रुप में जिंदा रहते हैं!सादर नमन, लाल सलाम ,इंकलाब जिन्दाबाद !कॉम को पुण्यतिथि पर क्रन्तिकारी अभिवादन।भारतीय राजनीति के अनूठे शिल्पकार लंदन तोङ के नाम से विख्यात कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत की पुण्य तिथि पर कामरेड को क्रांतिकारी नमन्”लाल सलाम।
“मेरा नाम लंदनतोड़ सिंह है.”
साल 1972, पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में लोगों का एक जत्था बढ़ रही महंगाई के खिलाफ कूच करता है।सूबे के नए मुख्यमंत्री बौखला जाते हैं और प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के आदेश दे बैठते हैं।जैसे ही उनका आदेश आया पुलिस ने लट्ठ बरसाने शुरू कर दिए। लेकिन लोग फिर भी पीछे नहीं हटे. पीछे हटते भी कैसे, उनके साथ खड़े थे लंदनतोड़ सिंह यानी सरदार हरकिशन सिंह सुरजीत। जब लाठीचार्ज से बात नहीं बनी तो करीब 250 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को बुड़ैल जेल में डाला दिया गया। *1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद जब क्यूबा की आर्थिक स्थिति ख़राब हो गई तो उन्होंने पार्टी की तरफ़ से क्यूबा को दस हज़ार टन गेहूं भिजवाने का बीड़ा उठाया।*
उन्होंने जब देखा कि सोवियत संघ बिखर गया है। क्यूबा की स्थिति बहुत गंभीर थी क्योंकि उनकी पूरी अर्थव्यवस्था सोवियत संघ पर निर्भर थी। क्यूबा के ऊपर प्रतिबंध लगा हुआ था जिसके कारण वो अपना सामान दुनिया में कहीं और नहीं भेज सकते थे। उस समय उन्हें मदद की सख़्त ज़रूरत थी, उनके पास नहाने के लिए साबुन नहीं था और न ही खाने के लिए गेहूं। “कामरेड सुरजीत ने ऐलान कर दिया कि वो दस हज़ार टन गेहूं क्यूबा को भेजेंगे, उन्होंने लोगों से अनाज जमा किया और पैसे जमा किए। उस ज़माने में नरसिम्हा राव की सरकार थी। उनके प्रयासों से पंजाब की मंडियों से एक विशेष ट्रेन कोलकाता बंदरगाह भेजी गई। मुझे अभी तक याद है उस शिप का नाम था कैरिबियन प्रिंसेज़।
उन्होंने नरसिम्हा राव से कहा कि हम दस हज़ार टन गेहूं भेज रहे हैं तो सरकार भी इतने का ही योगदान दे, सरकार ने भी इतना ही गेहूं दिया। उसके साथ दस हज़ार साबुन भी भेजे गए. वहां पर जब वो पोत पहुंचा तो उसे रिसीव करने के लिए फ़ीदेल कास्त्रो ने ख़ास तौर से सुरजीत को बुलवाया। उस मौके पर कास्त्रो ने कहा कि सुरजीत सोप और सुरजीत ब्रेड से क्यूबा ज़िंदा रहेगा कुछ दिनों तक। ✊
भगत सिंह से प्रभावित होकर हरकिशन सिंह ने क्रांति करने की सोची।इसमें पहला कदम उन्होंने रखा 16 साल की उम्र में होशियारपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में झंडा फहराकर।साल 1932 में उन्हें इसके लिए जेल भी जाना पड़ा था।।
कामरेड हर किशन सिंह सुरजीत अमर रहे ✊?
इंक़लाब ज़िंदाबाद ✊✊???