_____ ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) ने एकीकृत पेंशन योजना को बताया अंशदान योजना
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केन्द्र सरकार ने अभी-अभी एक “एकीकृत पेंशन योजना” की घोषणा की है, जिसके बारे में उनका कहना है कि यह पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना को मिलाकर बनाया गया है । हम राष्ट्रीय पेंशन योजना (नई पेंशन योजना) के खिलाफ इस देश के मजदूर वर्ग, खासकर सरकारी कर्मचारियों के संघर्ष की सराहना करते हैं । केन्द्र सरकार द्वारा दी गई यह रियायत इस संघर्ष का ही परिणाम है । साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि कई राज्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से लागू करने की वजह से केन्द्र सरकार को जबरदस्त धक्का लगा है । कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे समय में केन्द्र अब मजदूरों के वोट पाने के लिए यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि वह कितनी उदार है । यह विज्ञप्ति टीयूसीआई के राष्ट्रीय महासचिव संजय सिंघवी ने जारी की !
उन्होंने कहा कि हालांकि, इस बात को लेकर काफी हो-हल्ला मचाया जा रहा है कि इस एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की व्यवस्था की बहाली होगी । लेकिन यह असली सच्चाई को छुपाना है । एकीकृत पेंशन योजना की वास्तविक अधिसूचना अभी भी उपलब्ध नहीं है और जैसे ही यह उपलब्ध होगी, हम निश्चित रूप से इसका अध्ययन करेंगे और इस पर टिप्पणी भी करेंगे । हालांकि, यह स्पष्ट है कि यह योजना एक ‘‘अंशदान योजना’’ बनी हुई है, न कि पुरानी पेंशन योजना की तरह ‘‘परिभाषित लाभ योजना’’ है ।
कामरेड सिंघवी ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना में अंतिम आहरित वेतन और सेवाकाल के आधार पर प्राप्त होने वाले लाभों को परिभाषित किया गया था । नई पेंशन योजना एक ‘‘परिभाषित अंशदान योजना’’ है, जिसका अर्थ है कि कर्मचारी अपना अंशदान करते हैं (उनके वेतन का 10 प्रतिशत) और प्राप्त होने वाला लाभ अंशदान की गई राशि पर निर्भर करता है, जिसका उपयोग सरकार वार्षिकियां खरीदने के लिए करेगी । एकीकृत पेंशन योजना में कुछ बदलावों के साथ मूल रूप से ‘‘परिभाषित अंशदान योजना’’ की संरचना को बनाए रखा गया है । इसमें कर्मचारियों का अंशदान 10 प्रतिशत रहेगा, जबकि सरकार का कहना है कि वह अपना अंशदान 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत करेगी । किन्तु इसमें एक शर्त है, सरकार का अंशदान एक्चुरियल (वास्तविक) जरूरतों के अनुसार बढ़ या घट सकता है । इसका मतलब यह है कि वास्तव में सरकार का योगदान कम हो सकता है ।
उनहोंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति में एक और बात जो ध्यान देने लायक है, वह यह है कि पेंशन कर्मचारी के मूल वेतन का 50 प्रतिशत होगी। वर्तमान समय में डीए (महंगाई भत्ता) मूल वेतन का 50 प्रतिशत है । पुरानी पेंशन योजना में पेंशन की गणना ‘‘वेतन’’ के 50 प्रतिशत पर की जाती थी । यदि अंतिम अधिसूचना में मूल वेतन में डीए को शामिल नहीं किया जाता है, तो कर्मचारियों को काफी नुकसान होगा ।
श्री सिंघवी ने कहा कि यह भी घोषणा की गई है कि सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी के अलावा सेवाकाल के प्रति छह महीने के लिए मासिक परिलब्धियों (बेसिक प्लस डीए) के 1/10 का अतिरिक्त एकमुश्त दिया जाएगा । इसका मतलब यह होगा कि सेवाकाल के प्रति वर्ष के लिए मौजूदा 15 दिनों के स्थान पर ग्रेच्युटी की गणना के लिए अतिरिक्त 5 या 6 दिन मिलेंगे । हालांकि यह एक लाभ है, लेकिन यह केवल एक बार का भुगतान होगा ।
उन्होंने कहा कि एक और परेशान करने वाला पहलू यह है कि प्रेस विज्ञप्ति न्यूनतम 10 साल की सेवा के बाद ‘‘सेवानिवृत्ति पर’’ सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन की बात की गई है । इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति की 10 साल बाद लेकिन सेवानिवृत्ति की आयु से पहले मृत्यु हो जाती है या वह नौकरी छोड़ देता है तो उसे न्यूनतम पेंशन नहीं मिल पाएगा । यह 25 साल की सेवा के बाद 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन पर भी लागू होता है । यहां भी प्रेस विज्ञप्ति में ग्रेच्युटी में वृद्धि के लिए ‘‘सेवानिवृत्ति’’ शब्द का उपयोग किया गया है । अंतिम विश्लेषण में, हालांकि कुछ लाभ प्रतीत होते हैं, यह अभी भी एक अंशदायी पेंशन योजना बनी हुई है । कुछ न्यूनतम राशि प्रदान की गई है, लेकिन यह केवल सेवानिवृत्ति पर ही लागू होती हैं और यदि कर्मचारी पात्र सेवाकाल के बाद इस्तीफा देता है तो नहीं । वास्तव में, यह एक सुनहरा पिंजरा है !