_”’ बेकरी भुखमरी कुपोषण शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं की बदहखली और सरकारी पर संपत्तियों का निजी हाथों में सौंपे जाने से देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न होने लगी है।
देश में बड़ी संख्या में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं उन्हें संतुलित भोजन मिलना तो दूर की बात है पेट भर रोटी नहीं मिल पा रही है एक वर्ग ऐसा भी है जो काम की तलाश में रात दिन भटक रहा है । जिसे ढ़ूढ़ने से भी काम नहीं मिल रहा है।
सरकार सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास जीतने की बात कह कर देश की बदहाली पर पर्दा डाल रही है और देश को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का राग अलापकर आम लोगों को दिन में सपने दिखाने की कोशिश कर रही है!
साथियों अपने पैर में लगे कांटे को खुद निकालना होगा देश में जो आर्थिक असमानता बड़ रही है उसका इलाज करने के लिए हमें लड़ना होगा तभी इन समस्याओं का हल होगा।
