राकेश रागी, चीफ एडीटर
विचार एवं विश्लेषण
_______ हरियाणा चुनाव की हार के बाद दिल्ली महाराष्ट्र में भी इंडिया गठबंधन में होगी खींचतान
_____ एक दूसरे पर छींटाकशी करने से बेहतर होगा इंडिया गठबंधन को मजबूत बनाएं और मिलकर चुनाव लड़ें!
हरियाणा की हार और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के भरोसे मिली कामयाबी साबित करती है कि कांग्रेस का परफॉर्मेंस सहयोगियों के भरोसे ही रहता है – और यही वजह है कि राहुल गांधी को उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल की बातें सुननी पड़ रही हैं.! वो अलग बात हैं इंडिया गठबंधन में शामिल कोई भी दल नहीं चाहता है कि कांग्रेस उभरे मजबूरी में इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने हुए हैं हरियाणा में आम आदमी पार्टी की जो दुर्दशा हुई है। उसके लिए राहुल गांधी को दोषी ठहराने से बेहतर होगा कि केजरीवाल अपनी पार्टी की दुर्दशा से सीखने की कोशिश करे तो बेहतर होगा !
हरियाणा में हार मिलते ही राहुल गांधी को नसीहतें मिलने लगी हैं.
जीत सन्नाटे में भी जश्न का एहसास कराती है, और हार एक साथ कई मुसीबतें लेकर आती है. नसीहत भी ऐसी ही एक मुसीबत है – और राहुल गांधी को अभी से हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद मिलने लगी है.
हरियाणा की हार और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के भरोसे मिली कामयाबी साबित करती है कि कांग्रेस का परफॉर्मेंस सहयोगियों के भरोसे ही रहता है. लोकसभा चुनाव में भी उसे यूपी जैसे राज्य में जो कामयाबी मिली, वो भी समाजवादी पार्टी जैसे मजबूत क्षेत्रीय दल के भरोसे ही थी.
ऐसे में लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी जिस तेजी से आगे बढ़ रहे थे, उस चाल पर लगाम डालने और उन्हें थोड़ा दायरे में रहने का पैमाग लेकर इंडिया गठबंधन के सहयोगी हाजिर हुए हैं. ये कोई और नहीं, आगामी महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके संभावित सहयोगी शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और आम आदमी पार्टी हैं. राहुल गांधी के लिए उनका पैगाम इसलिए भी खास हो जाता है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस अगर कोई मोलभाव करे, तो वह अपनी सीमाओं का ख्याल जरूर रखे!
हरियाणा की हार के बाद भले ही राहुल गांधी की इमेज पर सवाल उठाने की कोशिश हो रही हो परंतु जिस तरीके से हरियाणा में आम आदमी पार्टी का सुपड़ा साफ हुआ है उससे यह साबित होता है कि अगर दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है। जिसके लिए अरविंद केजरीवाल खुद जिम्मेदार होंगे!
कांग्रेस पार्टी की तरह अगर सभी क्षेत्रीय दल आपस में सामंजस बनाने का प्रयास करते हैं तो दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनाव में भी तथा कथित इंडिया गठबंधन को जीत मिल सकती है एक दूसरे पर आरोप लगाना अलग बात है गठबंधन को मजबूत करना अलग बात है जिस तरीके से अरविंद केजरीवाल जेल से रियल होने के बाद कुर्सी छोड़ने का ड्रामा कर रहे हैं उसे ड्रम का हरियाणा में कोई लाभ नहीं मिला है इसलिए उन्हें सजग रहते हुए दिल्ली के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुड़ना चाहिए कांग्रेस को नसीहत देने से बेहतर होगा की जो वोट बटेगा उसे कैसे रोका जाए इस बात पर चिंतन करना चाहिए!
