_______मेजा प्रशाशन नारि गांव की आदिवासी बस्ती जमीदोज करने पर अमादा।*
______ उप्र राजस्व कोड व जीओ की अवहेलना*
__________ इलाके के आदिवासियों में व्यापक असंतोष*
_______ 19 को नारि गांव में विशाल ध्वस्तीकरण विरोध सभा का किया जाएगा आयोजक
प्रयागराज
_________ कल, दिनांक 17 नवंबर को प्रशाशन दने नारि गांव स्थित तालाबी रकबा 63 मि० दुर्गा प्रसाद, देव प्रसाद पांडे का घर बिना प्रक्रिया अपनाये जमीदोज कर दिया। उसकी 19 नवंबर को करीब 100 आदिवासियों का घर जाने की तैयारी है।
उक्त बस्ती 1994 से बसी हुई है। आदिवासी दशकों से आवासीय पट्टे व आवास की मांग करते रहे हैं। पर प्रशासन ने केवल विस्थापन के नोटिस पकड़ाए हैं।
आज मेजर एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर उन्हें याद दिलाया कि 16 जनवरी 2009 को जारी शासनादेश संख्या की E – 311/G – C -1 सी/2007 में स्पष्ट निर्देश है की तालाबों पर अवैध कबजेदार गरीबों को अन्य जगह बसाया जाए ।
नोटिस के जवाब में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 का की धारा 67 ए का हवाला देते हुए कहा गया कि 29 नवंबर 2000 को जिनके घर विद्यमान हो, उनका वही बंदोबस्त किया जाए।
साथ में गांव सभा की जमीनों पर वैकल्पिक पेट्टे व आवास निर्माण की धनराशि देने के बाद ही विस्थापन करने की मांग की गई।
13 नवंबर, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि बिना संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया अपनाए यदि आश्रय का ध्वस्तीकरण किया गया तो अधिकारियों के एक्शन एवं इनेक्शन, दोनों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा जाएगा।
वन अधिकार संघर्ष समिति ने मेजा प्रशाशन के विस्थापन के कार्यवाही की निंदा की। 19 नवंबर को नारि गांव में सभा कर विस्थापन का विरोध किया जाएगा।
मंजेश कोल, अध्यक्ष
लाल बिहारी कोल, महा सचिव
वन अधिकार संघर्ष समिति
