______भारतीय संविधान एवं फासिज्म के खतरे” विषय एक संगोष्ठी का आयोजन’
देवरिया!
बागड़ा महुआरी, देवरिया स्थित प्रेमचंद पुस्तकालय एवं वाचनालय तथा किसान मज़दूर विचार केंद्र के तत्वाधान में “भारतीय संविधान एवं फासिज्म के खतरे” विषय पर कॉमरेड प्रेमलता पांडे की अध्यक्षता में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें वर्तमान में सरकार द्वारा लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावहीन किए जाने एवं कारपोरेट जगत की अप्रत्यक्ष तत्वों की दबाव में तानाशाही पूर्ण नीतियों को लागू किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई। गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए आजमगढ़ से आए कामरेड जयप्रकाश नारायण ने कहा कि भारत के जनता के बीच स्थापित लोक पर्वों तथा धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर सरकारी मशीनरी के माध्यम से वैज्ञानिक और अंधविश्वासी माहौल पैदा किया जा रहा है। वर्तमान में कॉर्पोरेट परस्त सरकार द्वारा भारत के सकारात्मक मूल्यों मान्यताओं और ज्ञान की परंपरा को नष्ट किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभाव में निर्मित संविधान की उपेक्षा करते हुए देशी विदेशी पूंजीपत्तियों के फायदे की लुटेरी नीतियां लागू की जा रही हैं। यह सब कुछ हिटलर मुसोलिनी की फासिस्ट नीतियों के तर्ज पर किया जा रहा है। इसके खिलाफ जाति और धर्म के राजनीति से ऊपर उठकर मजदूर किसान की पहचान के साथ संघर्ष करने की जरूरत है।
गोष्ठी में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह ने डिक्टेटरशिप और फसिस्म के के बीच के फल को रेखांकित किया और आज के दौर में उसे सबसे बड़ी चुनौती बताया। पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा ने कहा कि जब देवरिया जिले के कुछ गांव को नक्सली गांव कहकर प्रताड़ित करने की योजना बना रही थी उसे समय उन्होंने उत्तर प्रदेश की विधानसभा में इस पर बहस करा कर इसे खारिज कराया था। समान शिक्षा आंदोलन के सहसंयोजक डॉक्टर चतुरानन ओझा ने कहा कि फासिज्म का पहला हमला शिक्षा और शिक्षण संस्थानों पर किया गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दरअसल शिक्षा से बेदखली का घोषणा पत्र है। यहां से वैज्ञानिक चिंतन को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कामरेड प्रेमलता जी ने कहा कि फासीवाद का मुकाबला सिर्फ समाजवादी विचारधारा के द्वारा ही किया जा सकता है जिसका नेतृत्व करने के लिए वैज्ञानिक और तार्किक विचारों पर आधारित कम्युनिस्ट विचारों और संगठन की को मजबूत करने की जरूरत है।
गोष्टी के अंत में सीपीआई एमएल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जयप्रकाश प्रकाश नारायण ने शिवाजी राय को सीपीआईएमएल की सदस्यता प्रदान किया। इस अवसर पर कामरेड गीता पांडे के साथ भारी मात्रा में महिला कामरेड साथियों ने भी भाग लिया। गोष्ठी में राष्ट्रीय लोक दल के जिला अध्यक्ष रमाशंकर चौहान ,गोवर्धन गौड़, पत्रकार हृदयानंद शर्मा, डॉक्टर शाकिर अली डॉक्टर आलोक पांडे, एडवोकेट उद्भव मिश्रा, जेएनयू से आए बृजेश यादव, डॉ सुनीता अवाबिल, जवाहर चौहान जी, समाजवादी नेता नित्यानंद त्रिपाठी, बृजेंद्र मणि त्रिपाठी, विकास दुबे, सुभाष राय ,महेंद्र अंबेडकर जी, राजेश चौहान, पैगाम में अमन के मोहम्मद खालिद, राम दुलारे पत्रकार, जनार्दन शाही जी, अभिषेक बाबू ,जय सिंह ,ज्योति राय आदि ने मुख्य रूप से अपने विचार व्यक्त किया। गोष्ठी का संचालन डॉक्टर दुर्गेश राय ने किया। अंत में आयोजक शिवाजी राय ने समस्त आगंतुकों और वक्ताओं का आभार प्रकट किया।
