_______ लगा दो सारा बक्त अपने बक्त को बदलने में ,शेष तो लोगों का काम है कहना ,,,,,,,, अशोक यादव
म मैनपुरी / उत्तर प्रदेश
लोगो ने राष्ट्रवाद ,धर्म की परिभाषा बदल दी है ।जिन लोगो ने अंग्रेजों से माफी मांगी और आजादी की लड़ाई में हिस्सेदारी भी नही की वह लोग आज धर्म के ठेकेदार बनकर राष्ट्रवाद की झूठी दुहाई देने लगे।
शहीद भगत सिंह ने कहा था ।अंधभक्ति और पाखंडवाद के खिलाफ़ बोलना भी राष्ट्रवाद है ।और आज राजनिति ने इन दोनों को हथियार बना लिया है। आज साधू सन्तो में सत्ता के लिए उथल पुथल मची है।इसका मतलब साफ है कि वह लोग ईश्वर पर विश्वास नही करते है वल्कि उस इंसान को खुदा बनाने में लगे है ।जो हकीकत में इंसान भी नही है ।
किसी भी देश की सफलता वहा के नागरिकों की सफलता पर निर्भर करती है। न कि वहां के जाति धर्म पर भारत एक ऐसा देश है जहाँ कोस कोस पर पानी बदले ,चार कोस पर वाणी , भिन्न भिन्न धर्मो से मिलकर हिंदुस्तान बना है ।और सभी धर्मों का सम्मान करके यहाँ का सँविधान बना है ।जो हमे अधिकारों से अधिक कर्तव्यों पर चलने का पाठ पढ़ता है। प्रत्येक नागरिक यदि अपने बच्चे को पढा
लिखा कर सफल बना देता है तो सही मायने में राष्ट्रभक्त है।
लम्हा -दर – लम्हा गुजरता ही चला जाता है ,वक्त खुश्बू है जो बिखेरता जाता है। माँ बाप के सपने तभी पूरे होते है ।जब उनके बच्चों के चर्चे समाज और देश मे होते है। जिन्हें भाग्य का मिलाता है उनकी चर्चा सीमित होती है ।जिनका जितना बड़ा संघर्ष होता है उनकी उतनी ही अधिकः चर्चा भी होती है।
महान बनने के कोई विद्यालय नही होते है। इंसान के कर्म, वाणी ,व्यवहार ही उसे महानता की तरफ लेकर जाते है।
