________संसद में खुद ओम बिरला जी भी मोदी की गुलामी करते करते संसद में अपोजीशन के हर सदस्य को डराते धमकाते नजर आते हैं. ….!!
नई दिल्ली. ….!
मोदी जी का गुंडा राज इतना वीभत्स है कि खुद ओम बिरला जी भी मोदी की गुलामी करते करते संसद में अपोजीशन के हर सदस्य को डराते धमकाते नज़र आते हैं । कुछ रटा रटाया की तरहां सदन में दूसरों के खिलाफ बोलते हैं और फौरन उसके प्रतिकार से डर कर सदन की कार्रवाई को स्थगित कर देते हैं। चेहरे पर उडती हवाइयां क्या क्या नहीं बयान करतीं? माईक किसके हाथ में है ये बात विशेष नहीं कैमरा जो जो जो दिखाता है ओ छुपा देता है वहीं विशेष होता है !!
________क्या आज के गांधी से भी सत्ता इतिहास के गांधी जितना ही डरती है ?
इमरान प्रतापगढ़ी की कविता के बोल से गुजरात पुलिस बहुत डर जाती है और उसे लगता है कि अरे उससे तो हमारे मोदी जी एक्सपोज़ होने जा रहे हैं। कविता में लिखा है “” ए खून के प्यासे सुनो ” बस 2002 में मोदी को बचाने वाली पुलिस घबरा जाती है कि ये तो हमारे मोदी जी के लिए ही लिखा गया है । हमने जिस मोदी को बचाया था वो तब चीफ मिनिस्टर था और अब तो वो प्रधानमंत्री है, बस फिर क्या था, आनन फानन इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया जाता है। इमरान प्रतापगढ़ी की इस कविता को दसवीं कक्षा का छात्र भी हिंसा के खिलाफ समझ सकता है और जिसे सुप्रीम कोर्ट भी महज़ शांति पूर्ण कविता मानती है वहीं उसी कविता को गुजरात का एक गुलाम मानसिकता वाला हाईकोर्ट का कोई जज इसे अपनी मोदी चापलूसी दिखाने के अवसर की तरह लपक लेता लगता हैं और वो झट-पट पुलिस के कुकर्म पर अपनी मुहर लगा देता हैं। उसे भी कविता के अर्थ में अनर्थ दिखाई देता है। संविधान में निहित अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता की सारी पढ़ाई-लिखाई धरी की धरी रह जाती है।
ऐसे ऐसे लोग हाईकोर्ट के जज बने हुए हैं जिनके कैश तक को छुपाने को ग्रह मंत्री की दिल्ली पुलिस अपना पूरा पूरा सहयोग हर तरह से देती रहती है ?
ये जो हमारा नैतिक, धार्मिक , आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक बंटाधार हो रहा है इसे अमृत काल कहना क्या अतिशयोक्ति है? पूछता है भारत!!
