_______ प्रधानमंत्री शक्तिशाली है, कि सुप्रीम कोर्ट शक्तिशाली या राष्ट्रपति सर्वशक्तिमान यह बहस बेमतलब जनविरोधी…!!
_____कौन कितना ताकतवर इस असंवैधानिक सिद्धांतहीन तकरार से क्या होगा जनता का भला ..!!
नई दिल्ली. ..!!
वैसे तो सब एक हैं। जब इनके आपस में हित टकराते हैं, तो सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच रार सार्वजनिक हो जाती है। राष्ट्रपति को संवैधानिक संरक्षक की भूमिका निभानी चाहिए लेकिन मौजूदा सूरत – ए – हाल में वह एक पक्ष की हिमायत करते दिखाई दे रहीं है। लेहाज़ा इस असंवैधानिक सिद्धांतहीन तकरार से जनता का क्या भला होगा ?
हर सरकार की तरह केन्द्र सरकार अपने राजनीतिक दल के अलावा दिगर दल की राज्य सरकारों पर केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल जब दलगत राजनीति में संलिप्त होकर निर्वाचित राज्य सरकार के विधेयक को अनावश्यक तौर पर सालों अवलम्बित करती हैं, तब निर्वाचित सरकार विक्षुब्ध – बाध्य होकर अपने राज्य की जनता का भलाई और हित सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संविधान में मिले संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाती है।
___सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने तमिलनाडु के लम्बित विधेयक को पारित कर दिया !
माननीय सुप्रीम कोर्ट की द्विसदस्यीय पीठ जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस आर महादेवन ने दिनांक 8 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल के समक्ष लम्बित सभी दसों विधेयक को पारित कर दिया एवं संविधान के अनुच्छेद 201 मे मिले अधिकार के तहत आदेशित किया किसी भी विधेयक का राज्यपाल राष्ट्रपति तीन महीने के भीतर समाधान करें।
केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को राज्यपाल की अवमानना नही केन्द्र सरकार के राजनीतिक नफा – नुकसान के तौर पर मानते हुए महामहिम राष्ट्रपति को इस राजनीतिक भसड़ में उतारते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 14 बिन्दुओं का सवाल ही खड़ा कर दिया।
_____ 14 सवाल इस प्रकार हैं ..!!
1. जब राज्यपाल के पास कोई विधेयक आता है तो उनके सामने कौन-कौन से संवैधानिक विकल्प होते हैं ?
2. क्या राज्यपाल फैसला लेते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं ?
3. क्या राज्यपाल के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है ?
4. क्या संविधान का अनुच्छेद 361 राज्यपाल के निर्णयों पर न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह रोक सकता है ?
5. यदि संविधान में राज्यपाल के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट समयसीमा तय कर सकता है ?
6. क्या राष्ट्रपति के निर्णय को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है ?
7. क्या राष्ट्रपति के फैसलों पर भी कोर्ट समयसीमा तय कर सकता है ?
8. क्या राष्ट्रपति के लिए सर्वोच्च न्यायालय से राय लेना अनिवार्य है ?
9. क्या राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसलों पर कानून लागू होने से पहले ही कोर्ट सुनवाई कर सकता है ?
10. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का उपयोग करके राष्ट्रपति या राज्यपाल के निर्णयों को बदल सकता है ?
11. क्या राज्य विधानसभा से पारित कानून राज्यपाल की स्वीकृति के बिना लागू होता है ?
12. क्या संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ को भेजना अनिवार्य है ?
13. क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्देश या आदेश दे सकता है जो संविधान या मौजूदा कानूनों से मेल न खाता हो ?
14. क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद केवल सुप्रीम कोर्ट ही सुलझा सकता है ?
__सरकार, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति के मध्य मचे इस मचमच में जनसामान्य अनुपस्थित है, जबकि लोकतंत्र में सर्वोच्च सर्वमान्य सर्वशक्तिमान जनता होती है..!! .सलाम – ए - सुबह …18 मई 2025
