_____ महाराष्ट्र सरकार ने प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश की नहीं की अगवानी…!!
_____ प्रोटोकाल के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त को उनकी करनी चाहिए थीअगवानी…!!
नई दिल्ली. ..!!
दलित समुदाय से आने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का अपमान करके बीजेपी ने एक बार फिर अपनी मनुवादी मानसिकता को एक्सपोज कर दिया है।
महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को पहले से पता था कि मुख्य न्यायाधीश का दौरा होने वाला है। मुख्य न्यायाधीश का दौरा एक दिन में तय नहीं होता। भारत का मुख्य न्यायाधीश इस देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक है।
ऐसे में प्रोटोकॉल के मुताबिक राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त को उनकी अगवानी में उपस्थित होना चाहिए था लेकिन ये तीनों गायब थे। सवाल है क्यों? क्या बिना राज्य सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों की सहमति के बगैर ऐसा हो सकता है?
जवाब है – नहीं।
जब मामला उछला तो डैमेज कंट्रोल के लिए औपचारिक तौर पर माफी मांग ली गई है लेकिन इससे यह मुद्दा शांत नहीं होने वाला। हम मनुवादी ताकतों के हाथ दलित न्यायाधीश का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
आपको याद होगा कि ऐसा ही सलूक बीजेपी सरकार द्वारा माननीय राष्ट्रपति महोदया के साथ भी किया गया था जो कि आदिवासी समुदाय से आती हैं।
भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी भले ही डॉ अंबेडकर का नाम जपते हैं और वोट लेने के लिए दलितों का हितैषी बनाने का दावा करते हैं लेकिन सचाई यह है कि उनकी मानसिकता मनुवादी है। ये लोग संविधान के बजाय मनुस्मृति से देश चलाना चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो दलित चीफ जस्टिस का अपमान करने की हिमाकत महाराष्ट्र के नौकरशाह नहीं कर पाते।
मेरी मांग है कि चीफ जस्टिस का अपमान करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणनवीस को माफी मांगनी चाहिए।
जय संविधान… जय भारत… जय भीम…!!
