_____ लाल बहादुर ने प्रधानमंत्री होते हुए भी बैंक से लोन लिया और फिएट कंपनी की एक कार खरीदी. ..!!
______जीवन की एक प्रेरणादायक घटना आज भी देशभर में ईमानदारी और मूल्यों की मिसाल के रूप में सुनाई जातीय
नई दिल्ली. .!!
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों के प्रतीक माने जाते हैं। उनके जीवन की एक प्रेरणादायक घटना आज भी देशभर में ईमानदारी और मूल्यों की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है। यह घटना उस समय की है जब वे देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन आर्थिक रूप से बेहद साधारण जीवन जीते थे।
लाल बहादुर शास्त्री जी ने जब प्रधानमंत्री का पद संभाला, तब उनके परिवार के पास खुद की कोई कार नहीं थी। एक बार उनके बच्चों ने इच्छा जाहिर की कि घर में एक कार होनी चाहिए। बच्चों की यह बात शास्त्री जी को छोटी नहीं लगी, लेकिन उनके पास उतने संसाधन नहीं थे कि वे अपनी तनख्वाह से पूरी रकम देकर कार खरीद सकें। ऐसे में उन्होंने प्रधानमंत्री होते हुए भी बैंक से लोन लिया और फिएट कंपनी की एक कार खरीदी।
यह बात ही अपने आप में चौंकाने वाली थी कि देश का सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति लोन लेकर कार खरीद रहा है। यह दिखाता है कि शास्त्री जी के लिए सरकारी पद कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक सेवा का माध्यम था। वे अपने व्यक्तिगत खर्चों को लेकर बेहद अनुशासित और ईमानदार थे।
हालांकि दुर्भाग्यवश, कार का लोन पूरी तरह चुकाने से पहले ही 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनके परिवार को संदेश भिजवाया कि बैंक लोन को माफ कर दिया जाएगा। यह एक तरह की श्रद्धांजलि और सम्मान का भाव था। लेकिन इस प्रस्ताव को उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने नम्रतापूर्वक ठुकरा दिया।
ललिता शास्त्री जी ने स्पष्ट कहा कि उनके पति ने जो रास्ता अपनाया, वह परिवार के लिए आदर्श है। वह नहीं चाहती थीं कि उनकी पारिवारिक जिम्मेदारी किसी और की कृपा से पूरी हो। उन्होंने तय किया कि वे स्वयं इस लोन को चुकाएंगी। इसके बाद उन्होंने चार वर्षों तक लगातार EMI भरकर बैंक का सारा कर्ज चुका दिया।
यह निर्णय आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे एक प्रधानमंत्री की पत्नी ने भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। यह घटना केवल शास्त्री जी की ईमानदारी की नहीं, बल्कि उनकी पत्नी की भी उच्च नैतिकता की परिचायक है। यह दर्शाता है कि उनके परिवार ने सादगी, नैतिकता और आत्मसम्मान की जो परंपरा अपनाई थी, वह केवल दिखावे की नहीं, बल्कि उनके जीवन का आधार थी।
