राकेश रागी, चीफ एडीटर
_______ इटावा के गांव दांदरपुर में सामने आया मनुवाद का घृड़ित चेहरा जाति के आधार पर कथा वाचक का मुंडाया सिर ..!!!
_____ ब्राह्मण बाहुल्य गांव में यादव कथावाचक कह रहा था भागवत कथा ….!!!
_______मनुवादियों ने कथावाचक का सिर मुंडवाने के बाद ब्राह्मण महिला का मूत्र कथा वाचक के शरीर पर छिड़कर किया पतित्र…!!!
नई दिल्ली. .!!!
देश में संविधान से चलता है धर्मनिरपेक्षता पर आधारित शासन पद्धति होने के बाद भी जातिवाद की जड़े इतनी गहरी है कि अभी भी उखड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं इसे ब्राह्मणवाद कहा जाए या फिर मनुवाद जो भी हो यह पाखंड समाजिक एकता के लिए गम्भीर खतरा माना जा रहा है। समाज में घटित जाति पर आधारित घटनाएं विभ्भिन रूपों में समाने आ रहीं है इन घटनाओं पर अंकुश न लगाया गया तो कभी भी विकराल रूप ले सकती है…!!
उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में ठाकुरों ने दलितों की बारात रोक दी और जातिसूचक गालियां दी उस घटना के भयानक रूप को देकर इस बात का आसान होता है कि आज भी जातिवाद का सामंती चेहरा कितना डरावना है ..!!
कल इटावा के बकेवर थाना क्षेत्र के दांदरपुर गांव में कथा वाचक का ब्राह्मणवादियों ने सिर्फ इस लिए सिर के बाल मुड़वा दिए कि वह यादव जाति से ताल्लुक रखते हुए कथा कहता है वो भी ब्राह्मण वाहुल्य गांव में यह घटनाएं हमें किस तरफ ले जा रहीं है ! इन घटनाओं को कौन सी लिंचिंग का नाम दिया जाए कोई बतागा..!!
जाति को आधार बनाकर देश में अक्सर कभी अच्छे कपड़े पहनने को लेकर तो कभी मूंछ रखने शादी विवाह में घोड़ी पर बैठने को लेकर दलितों पिछड़ों और आदिवासियों को अपमानित किया जाता है यहां तक कई क्षेत्रों हत्याएं कर देने की भी घटनाएं घटित हुई है..!!
भारत में जातिवाद एक जटिल और बहुस्तरीय समस्या है, जो सदियों से चली आ रही है। जातिवाद के कारण समाज में असमानता, भेदभाव और हिंसा की घटनाएं होती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख हिंदुओं पर चर्चा करते हैं जो भारत में जातिवाद की समस्या को दर्शाते हैं…!!
भारत में जाति व्यवस्था एक पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें लोगों को उनकी जाति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है यह व्यवस्था अक्सर असमानता और भेदभाव को बढ़ावा देती है..!!
जातिवाद के कारण समाज में भेदभाव और हिंसा की घटनाएं होती हैं। दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को अक्सर समाज में सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार नहीं मिलता..!!
जातिवाद के कारण समाज में शिक्षा और रोजगार में भेदभाव किया जाता है दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को अक्सर शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित रखा जाता है..!!
जातिवाद को समाप्त करने के लिए सरकारी स्तर पर किए गये प्रयास नाकाफी हैं, जिनमें आरक्षण और अन्य कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद जातिवाद की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है…!!
जातिवाद को समाप्त करने के लिए हमें समाज में जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देना होगा, साथ ही सरकारी प्रयासों को भी मजबूत करना होगा। हमें समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना होगा, आम जनता को जातिवाद से निजात दिलाने के लिए उन्हें आर्थिक समानता का पाठ पढ़ाना होगा जिससे सभी लोगों को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिले..!!
