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___ नव उदारवादी फासीवाद के छिपे हुए असली चेहरे को पहचानने और उसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की आवश्यकता. .!!
____जनवादी लेखक साहित्यकारों पत्रकारों को जनांदोलनों जुड़ना होगा तभी हम संभावित खतरों से निपट सकते है…!!
_____जनवादी लेखक संघ के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन में महासचिव संजीव कुमार ने पेश की रिपोर्ट…!!
बांदा / उत्तर प्रदेश. ..!!
जनवादी लेखक संघ के11वें राष्ट्रीय सम्मेलन में दूसरे दिन सांगठनिक सत्र की शुरुआत सांस्कृतिक लड़ाई लड़ते हुए जीत हासिल करने पर बल देते हुए साम्राज्यवादी नव उदारवाद फासीवाद के छिपे हुए असली चेहरे को पहचानने और उसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए जनवादी लेखक कवियों साहित्यकारों लेखकों पत्रकारों शायरों को जनांदोलनों जुड़ना होगा तभी हम संभावित खतरों से निपट सकते है…!!
न्यायपालिका सरकार के गहरे दबाव में है केंद्रीय एजेंसियां लेखकों पत्रकारों सामाजिक कार्यकर्त्ताओं को शाजिशज फसाने का काम कर रहीं है महिला अपराधों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है सरकार के दबाव के कारण न्यायपालिका पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता है। न्याय पालिका किसी को देश भक्त बताये यह अशोभनिय है..!!
सांगठनिक सत्र में भ्रष्टाचार के मामलों को प्रमुखता से उठाया गया चुनावी बांड. पीएम केयर फंड आदि कई मामलों को सूचना के अधिकार अधिनियम से बाहर कर दिया गया हैं यह “भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने की नाकाम कोशिशें है किसानों मजदूरों छात्र नौजवान पर हमले हो रहे है अभिव्यक्त की आजादी पर पहरा दिखाया जा रहा है ..!!
…!! सम्मेलन में साहित्य संस्कृति प्रगतिशील जनवादी विचार रखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है जनवादी नाटकों के मंचन को रोकना सरकार की आलोचना वाली साहित्य की विषय वस्तुओं के प्रशारण पर रोक लगाना शर्मनाक है..!!
उदारीकरण भूमंडलीकरण निजीकरण के दुष्परिणामों पर चर्चा की गई सबसे पहले निजीकरण के दुष्परिणामों का असर दिखने लगा है शिक्षा रोजगार स्वास्थ्य सेवाएं सब चौपट हो रही है उदारीकरण की बजह से छोटे-छोटे उधोग धंधे पूरी तरह ठप्प हो गए. भूमंडलीकरण के नाम पर आयात निर्यात की शर्तों को हटाकर पूंजीपतियों को लूट की छूट दे दी गई जिसका असर मंदी के रूप में देखा जा सकता है..!!
जनवरी लेखक संघ के सांगठनिक सत्र में केंद्र सरकार के फासीवादी हमले को गहराई से चिह्नित करते हुए जनवादी लेखकों कवियों और साहित्यकारों से नजदीकी से जन आंदोलन से जोड़ने की अपील की गई साथ ही जो हमले हो रहे हैं छात्रों नौजवानों किसानों मजदूरों की जो समस्याएं हैं उन समस्याओं की विषय वस्तु को अपनी रचना की विषय वस्तु से जोड़कर सरकार के फासीवादी चरित्र को बेनकाव करने पर भी जोर दिया गया..!!
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पूंजी के साथ धार्मिक गठजोड को खतरनाक बताते हुए सामाजिक भेदभाव और आडंबरों को छोड़ कर आम जनमानस को उनके अधिकारों के प्रति सजग करना भी जनवादी लेखकों का दायित्व है जिसे निभाना होगा…!!
सांगठनिक सत्र में राष्ट्रीय महासचिव संजीव कुमार ने रिपोर्ट पेश की मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष चंचल चौहान.ज्ञान प्रकाश चौवे.
नलिन रंजन सिंह आदि मौजूद रहे..!!
