___ सीपी आई एम एल मास लाइन ने 28 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस के रूप में मनाने का किया आवाहन …!!
___ चार श्रम संहिताओं को कानून में बदल दिया ये श्रम संहिताएँ विदेशी और देशी कॉरपोरेट घरानों के हित में बनाई गई हैं, …!!
___ कॉरपोरेट-नियंत्रित श्रम बाजार तैयार कर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, ठेका कर्मियों, योजना कर्मियों और गिग वर्कर्स के अधिकार खत्म न कोई सुरक्षा न कोई संरक्षण…!!
नई दिल्ली. ..!!
फासीवादी नरेंद्र मोदी सरकार ने समाज के हर वर्ग पर, विशेष रूप से मेहनतकश जनता पर — मजदूर वर्ग, असंगठित व योजना कर्मियों, गिग वर्कर्स, कृषि मजदूरों, ग्रामीण श्रमिकों, भूमिहीन और गरीब किसानों पर —चौतरफा हमला बोल दिया है। 21 नवंबर 2025 को मोदी सरकार ने संसद में विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति में और बिना किसी गंभीर बहस या चर्चा के चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को कानून में बदल दिया। ये श्रम संहिताएँ विदेशी और देशी कॉरपोरेट घरानों के हित में बनाई गई हैं, ताकि एक कॉरपोरेट-नियंत्रित श्रम बाजार तैयार किया जा सके। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, ठेका कर्मियों, योजना कर्मियों और गिग वर्कर्स के लिए न कोई सुरक्षा है, न कोई संरक्षण..!!
यह जानकारी देते हुए सीपीआईएमएल मस्त लाइन की राष्ट्रीय महासचिव कामरेड प्रदीप सिंह ठाकुर ने बताया कि मोदी सरकार ने मांग-आधारित और अधिकार-आधारित रोजगार गारंटी कानून — महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) — को समाप्त कर दिया है और उसकी जगह जीरामजी नाम से केंद्र द्वारा नियंत्रित व बजट-नियंत्रित योजना लागू की है। मनरेगा का खात्मा ग्रामीण गरीबों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के खिलाफ युद्ध की घोषणा है। यह सहकारी संघवाद पर भी सीधा हमला है। एक ओर केंद्र में सत्ता का केंद्रीकरण हो रहा है, दूसरी ओर राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है और जीरामजी के क्रियान्वयन के मामले में ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर कर दिया गया है…!!
उन्होंने कहा कि इसी तरह, भारत के किसान लगातार मोदी शासन के हमलों का सामना कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका के साथ चल रही वास्तविक बातचीत के बारे में जनता को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। लेकिन यह साफ है कि मोदी सरकार ट्रंप प्रशासन को खुश करने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही है — जैसे रूस से तेल आयात को धीरे-धीरे बंद करना और रक्षा ढांचा समझौते को दस वर्षों के लिए बढ़ाना। अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन के साझेदार देश वेनेजुएला पर किए गए हमले तथा उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के अपहरण के बाद मोदी सरकार की प्रतिक्रिया अत्यंत निंदनीय रही है। स्वयं को “विश्व गुरु” कहने वाला यह शासन अमेरिकी साम्राज्यवाद की इस सैन्य आक्रामकता की निंदा करने में विफल रहा, केवल ट्रंप प्रशासन को खुश करने के लिए..!!
कामरेड ने कहा कि ग्रीस और फिलिस्तीन में किसान सड़कों पर हैं। वे ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का विरोध कर रहे हैं जो उनके अस्तित्व को खतरे में डालते हैं। हमारे देश के किसान भी गहरी चिंता में हैं। 384 दिनों के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बावजूद, मोदी सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने में विफल रही है। भले ही तीन कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा, लेकिन नई कृषि उपज विपणन नीति, बीज विधेयक, विद्युत विधेयक 2025 आदि के जरिए किसान विरोधी हमले लगातार जारी हैं..!!
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट हितों में “जल-जंगल-जमीन” की खुली लूट की अनुमति देने के बाद अब मोदी सरकार अरावली पर्वतमाला के 90 प्रतिशत हिस्से को कॉरपोरेट्स को सौंपकर उसे नष्ट करने की कोशिश कर रही है। अरावली संपूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत की जीवनरेखा है। अवैध खनन के कारण हरियाणा में 3.64 लाख हेक्टेयर, पंजाब में 1.68 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 1.04 लाख हेक्टेयर भूमि पहले ही मरुस्थलीकरण से प्रभावित हो चुकी है। अरावली का और विनाश पूरे उत्तर-पश्चिम भारत को तबाही की ओर ले जाएगा। इस प्रकार फासीवादी मोदी शासन मानवता का भी दुश्मन है..!!
सीपीआइएमएल मास लाइन के महासचिव ने कहा कि “विशेष गहन पुनरीक्षण” (SIR) के नाम पर नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एक खतरनाक प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसके जरिए बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। आशंका है कि लगभग 11 करोड़ लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। महिलाएँ, दलित, आदिवासी, मुस्लिम और प्रवासी मजदूर इस मताधिकार-वंचना के सबसे बड़े शिकार हैं। मोदी-शाह की ओर से तथाकथित “घुसपैठियों” की पहचान का तर्क दिया जा रहा है। लेकिन अब तक चुनाव आयोग “घुसपैठियों” की कोई ठोस संख्या नहीं बता सका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बिहार में तथाकथित घुसपैठियों का प्रतिशत मात्र 0.012 है, जिनमें अधिकांश नेपाली महिलाएँ हैं, जो भारतीय नागरिकों से विवाहित हैं। एफआईआर के जरिए मोदी सरकार सीएए और एनआरसी को लागू करने की कोशिश कर रही है…!!
उन्होंने बताया कि आरएसएस और उसके विभिन्न संगठनों द्वारा मुसलमानों और उनके धार्मिक त्योहारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। यह स्थिति तब और भयावह हो गई जब जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को बंद करने के लिए दबाव डाला गया, केवल इसलिए कि 50 में से 42 चयनित छात्र मुस्लिम थे। इन छात्रों का चयन नीट में प्राप्त रैंक के आधार पर हुआ था, न कि किसी कथित तुष्टीकरण नीति के तहत। अब केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि ईसाई समुदाय भी गंभीर हमलों का सामना कर रहा है। यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम के अनुसार, 2014 में ईसाइयों पर हमलों की संख्या 139 थी, जो 2024 में बढ़कर 834 हो गई और नवंबर 2025 तक यह संख्या 706 पहुँच चुकी थी। क्रिसमस सप्ताह के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में 80 से अधिक हिंसक घटनाएँ, घृणास्पद भाषण और तनाव की घटनाएँ सामने आईं…!!
कामरेड ने कहा कि फासीवादी मोदी शासन के तहत एक और गंभीर प्रवृत्ति उभर रही है — दोहरा मापदंड। उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोग पाँच वर्षों से बिना सजा के जेल में बंद हैं और उन्हें जमानत नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी ओर, उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर रोकना पड़ा। इसी तरह, दो महिला शिष्यों से बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम सिंह को 15 बार पैरोल दी गई और वह कुल मिलाकर लगभग 400 दिन जेल से बाहर रहा। इससे स्पष्ट है कि आज प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका के कुछ मामलों में “जमानत नियम है, जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू नहीं होता..!!
उन्होने कहा कि इस समग्र परिस्थिति में फासीवादी आरएसएस–भाजपा के पूरे एजेंडे को पराजित करने और कॉरपोरेट–सांप्रदायिक गठजोड़ को तोड़ने के लिए एक अखिल भारतीय प्रतिवाद खड़ा करना समय की मांग है। धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के मूल मूल्यों की रक्षा और इसे मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी, जुझारू जन आंदोलन अनिवार्य है..!!
कामरेड प्रदीप सिंह ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं, विद्युत विधेयक और बीज विधेयक को रद्द करने, मनरेगा की बहाली, एमएसपी की कानूनी गारंटी, हर नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा, अरावली को बचाने तथा मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनता के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के लिए देशव्यापी संघर्ष आवश्यक है…!!
उन्होने कहा कि इसी उद्देश्य और दिशा के साथ 28 जनवरी को अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस घोषित किया गया है। यह केवल शुरुआत है—पहला कदम है। हमें विश्वास है कि आरएसएस–भाजपा की जनविरोधी, मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों का विरोध करने वाली सभी ताकतें एकजुट होंगी और इतना शक्तिशाली आंदोलन खड़ा करेंगी कि देश एक वैकल्पिक दिशा और वैकल्पिक कार्यक्रम की ओर बढ़ेगा..!!
राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि नव-उदारवादी अर्थव्यवस्था केवल मेहनतकश जनता की कीमत पर ‘अरबपति राज’ ही पैदा करेगी। वैकल्पिक कार्यक्रम और वैकल्पिक दिशा ही भारत की जनता के सामने एकमात्र रास्ता है…!!
आइए, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ें..!!
केंद्रीय समिति
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) मास लाइन
14 जनवरी 2026
