समय किसी का इंतजार नहीं करता है जो समय की कीमत नहीं समझते वह पीछे जाते हैं इसलिए आंखों पर बंदी अंधविश्वास की पट्टी को उतारो जागो और नवनिर्माण के लिए तैयार हो जाओ सृजन करो वैज्ञानिक सोच का विकास करो जिसे खत्म करने की एक सोची समझी साजिश रची जा रही है।
समय गुजर जाएगा बीता समय बाद में याद आएगी पाखंड और आडंबरों के बीच से निकलने वाला रास्ता तुम्हारी आने वाली पीढियों के अधिकार खो जाएगा उठो जागो सोने का वक्त गया सृजन करो जो आगे बढ़ रहे हैं उनसे मत चलो उन्हें अगर सहारा नहीं दे सकते हो तो तंग मत खींचे!
इस समय जो परिस्थितियां उभरकर सामने आ रही हैं वह सब संकेत दे रहे हैं कि अभी नहीं तो कभी नहीं इसलिए वक्त को पहचानो हो सके तो साथ चलो नहीं तो अपनी राह अलग बना लो सवाल एक ही है कि सृजन करो बच्चा को संविधान और लोकतंत्र को बचा लो सदियों पुराना इतिहास जो त्याग और तपस्या पर आधारित है बचा लो वह साहित्य और सृजन की परंपरा जो मुंशी प्रेमचंद और बाबा नागार्जुन द्वारा रखी गई थी एक बार फिर कहूंगा की जागो सोने का वक्त नहीं है सृजन करो सृजन करो सृजन करो
