______””तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है”…!!
मध्यप्रदेश. .!!
अदम गोंडवी की ग़ज़ल “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है” गांव की गरीबी और सरकारी दस्तावेजों में दिखाए गए झूठे आंकड़ों के बारे में है। यह ग़ज़ल समाज में व्याप्त असंतुलन और वास्तविक स्थिति से परे दिखाए गए आंकड़ों पर एक तीखा व्यंग्य है।
ग़ज़ल के कुछ अंश:
“तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।”
“इधर परदे के पीछे बर्बरियत और नवाबी है, तो वहीं दूसरी ओर अमीरी और गरीबी में होड़ लगी हुई है।”
“यहां जुम्मन के घर में आज भी फूटी रकाबी है।”
यह ग़ज़ल गांव की वास्तविक स्थिति और सरकारी दस्तावेजों में दिखाए गए आंकड़ों के बीच के अंतर को उजागर करती है।
इसी गजल को चरित्रार्थ करता सात सालों से सिस्टम से तंग हो चुके मुकेश_प्रजापति सीधा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी को संबोधित कर क्या कहा है सुनिए???
ये जो घिसट रहा है बीच सड़क पर कागज़ों के पुलिंदे में लिपटा हुआ, ये सिस्टम का सताया हुआ एक आम आदमी है। एक जागरूक नागरिक जो भ्रष्टाचार से इतना हताश हुआ कि सात सालों के संघर्ष और ऑफिस-ऑफिस खेलने के बाद उसने सरे बाज़ार सिस्टम का तमाशा बना दिया। उस सिस्टम का जिसने मुकेश कुमार की ज़िंदगी दुश्वार कर रखी थी।…
