_______ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के प्रतिनिधि मण्डल ने 16 वें वित्त आयोग की बैठक में लिया भाग. ..!!
______आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को माकपा की तरफ से एक दिया गया सुझाव पत्र…!!
______ 11 सूत्रीय मांग पत्र में अनुसूचित जाति जन जाति बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के के विशेष अवसर प्रदान करने पर दिया गया बल…!!
लखनऊ / उत्तर प्रदेश
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक प्रतिनिधि मंडल ने 16वें वित्त आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में भाग लिया और आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को माकपा की तरफ से एक सुझाव पत्र भी दिया। प्रतिनिधि मण्डल में माकपा राज्य सचिव कामरेड रविशंकर मिश्र के साथ ही राज्य सचिव मण्डल के सदस्य कामरेड मुकुट सिंह व कामरेड बीएल भारती मौजूद रहे. ..!!
■अध्यक्ष को दिये गये पत्र में माकपा द्वारा कहा गया कि उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है। अनेकानेक प्रयासों के बाद भी आज यहां पर बहुत कुछ, खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार (व्यवसाय) के क्षेत्र में, नहीं किया जा सका है। हमारी 27 प्रतिशत से अधिक आबादी से अधिक आज भी निरक्षर है। बेरोजगारों, शिक्षित-अशिक्षित दोनों, का एक बड़ा हिस्सा आज भी रोजी रोटी के लिए दर-दर भटकता रहता है। गांव से लेकर शहरों के लेबर चौराहों पर काम की तलाश में उमड़ने वाली भीड़, जिसका बड़ा हिस्सा नित्य निराश होकर घर लौट जाता है, अथवा दूसरे प्रदेशों में पलायन कर जाता है, इसका जीता जागता उदाहरण है। स्वास्थ्य के विकास के लिए उपयुक्त अवसरों का सृजन करने में अभी भी हम देश के कई राज्यों से पीछे हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उ0प्र0 में अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है और राज्य को अभी भी आपसे अधिक वित्तीय संसाधन जुटाने में अपेक्षायें हैं।
■संविधान की धारा 275 की पृष्ठभूमि में राज्य आपसे अधिक फण्ड की अपेक्षा कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश को उसी श्रेणी में रखे जाने की आवश्यकता है।
हम इस वित्तीय अनुदान का सदुपयोग ..!!
1. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बहुल आबादी वाले क्षेत्र में युवक-युवतियों की मुफ्त शिक्षा के ऊपर व्यय करने में।
2. शिक्षा की दृष्टि से अन्य पिछड़ेे क्षेत्र में जहां शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके, पर व्यय करने में।
3. प्रदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा को मजबूत बनाने, जहां मशीनों का उपयोग हो रहा है, उसके बदले मजदूरों से ही काम लेने तथा उनकी मजदूरी को बढ़ाकर प्रतिदिन 600 रूपये करने तथा मजदूरों को तत्काल भुगतान करने में।
4. ग्राम की भांति शहरी क्षेत्र के नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल शुरू करने में।
5. राज्य के प्रत्येक जिले में एक उद्योग लगाने की राज्य सरकार की योजना अमल में नहीं लायी जा सकी, इसे अमली जामा पहनाने में।
6. उत्तर प्रदेश कुपोषण के क्षेत्र में देश में सबसे आगे है। यहां आज भी 46.3प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इनमें 46.2प्रतिशत बच्चों की लंबाई कम है। 17.9प्रतिशत बच्चों की लंबाई के अनुपात में वजन कम है तथा 39.5 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है। इसका कारण उनके कुपोषित माता-पिता हैं। इससे लड़ने के लिए व्यापक स्वास्थ्य सुधार योजना बनाये जाने की जरूरत है। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए वित्त की आवश्यकता होगी। जिसके लिए होने वाले व्यय में।
7. आशा, आंगनवाडी, रसोइया आदि स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन दिये जाने में।
8. समस्त वृद्ध गरीबों को वृद्धावस्था पेंशन 5000 रूपये मासिक करने के लिए होने वाले व्यय में।
9. किसानों, मजदूरों को कर्जा मुक्त करने के लिए होने वाले व्यय में।
10. समस्त झोपड़पट्टी में रहने वालों को भूमि सहित पक्के आवास बनवाने में।
11. कृषि लागत में खाद, बीज आदि पर सब्सिडी बढ़ाने तथा फसलों पर सी-2$50प्रतिशत एमएसपी की गारंटी देने में उपरोक्त प्राप्त वित्तीय अनुदान खर्च किये जा सकेंगे।
धार्मिक आयोजनों या धार्मिक स्थलों के निर्माण में इस तरह के अनुदानों का धन खर्च नहीं किया जाना चाहिए।
श्रीमान जी से विनम्र आग्रह है कि उ0प्र0 राज्य को अपनी ओर से अधिक से अधिक वित्तीय संसाधन/अनुदान प्रदान करने की अनुशंसा केन्द्र सरकार से करेंगे, हम ऐसी आशा करते हैं।
वित्तीय संसाधनों को जुटाने के लिए यद्यपि कि संविधान की धारा 246, 276व 277 में प्राविधान किये गये हैं लेकिन उसके द्वारा अधिकाधिक कर संग्रह करना संभव नहीं है। उपरोक्त धारायें कर की एक सीमा भी तय करती हैं। लिहाजा आयोग को वित्तीय स्रोत को बढ़ाने के लिए बडे पूंजीपतियों और कारपोरेट जगत पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर इस समस्या का निराकरण किया जा सकता है..!!
