______ बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने अचानक मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण कराने की घोषणा ..!!
_______ विरोधी दलों के नेताओं ने निर्वाचन आयोग पर लगाया लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप. ..!!
______ मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने को प्रत्येक मतदाता को करना होगा आवेदन. ..!!
______ बिहार विधानसभा में नेता विरोधी दल तेजस्वी यादव ने कहा निर्वाचन आयोग दलित पिछड़ों और अल्पसंख्यक मतदाताओं को मतदान से बंचित करने का रच रहा हैं षडयंत्र…!!
पटना / बिहार. .!!
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने अचानक मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की है यह घोषणा लोकतंत्र की हत्या करने की साजिश है पुरानी मतदाता सूचियों को रद्द कर नई मतदाता सूचियां बनाई जाऐगीं सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रत्येक मतदाता को नई सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करना होगा यह प्रक्रिया बेहद संदेहास्पद और चिंताजनक है।
निर्वाचन आयोग ने आदेश दिया है कि सभी वर्तमान मतदाता सूची को रद्द करते हुए हर नागरिक को अपने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए नए सिरे से आवेदन देना होगा, भले ही उनका नाम पहले से ही सूची में क्यों न हो। विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए आयोग पर भाजपा आर एस एस के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है….!!!
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है. शुक्रवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. तेजस्वी ने कहा कि यह प्रक्रिया एक सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद गरीब, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से वंचित करना है…!!
तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जिस मतदाता सूची के आधार पर हाल ही में लोकसभा चुनाव हुए, उसे अचानक रद्द कर महज 25 दिनों में 8 करोड़ लोगों की नई सूची बनाना कैसे संभव हैं…??
उन्होंने कहा कि जब आखिरी बार साल 2003 में ऐसा विशेष पुनरीक्षण किया गया था, तब यह प्रक्रिया दो साल तक चली थी. “तो क्या लोकतंत्र की इतनी बड़ी जिम्मेदारी अब 25 दिनों में पूरी हो सकती है?” ….!!
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आयोग नागरिकता साबित करने के लिए जो दस्तावेज मांगता है, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, मैट्रिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र. राज्य की गरीब आबादी के पास ये नहीं हैं. बिहार में 40 साल से कम उम्र के 59 फीसदी लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. ऐसे में करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटना तय है….!!
तेजस्वी ने कहा कि आयोग को यह भी ध्यान रखना चाहिए था कि यह मानसून का मौसम है, जब लोग बाढ़, पलायन और खेती-किसानी के कारण अपने घरों से बाहर हैं. ऐसे में लोगों के लिए दस्तावेज जमा करना और उनका सत्यापन कराना काफी मुश्किल होगा…!!
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कवायद सिर्फ बिहार में ही क्यों की जा रही है? अगर यह प्रक्रिया जरूरी थी तो पूरे देश में क्यों नहीं लागू की गई? तेजस्वी ने कहा, ”बिहार को बार-बार चुनावी प्रयोगशाला बनाया जाता रहा है. पहले नोटबंदी हुई, अब वोटबंदी हो रही है.”…!!
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इसे महाराष्ट्र मॉडल की पुनरावृत्ति बताया. वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उसे ‘मोदी जी का बंदर’ बताया. भाकपा माले नेता दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा, “यह प्रक्रिया बिहार में जानबूझकर लागू की गई है, ताकि सत्ताधारी पार्टी को लाभ मिले.” तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि वे इस साजिश में शामिल हैं और दिल्ली जाकर भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू गरीबों को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करना चाहते हैं…!!!
