- _____ चुनाव आयोग “वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान ने मतदाताओं की खोल दी आंखें…!!
_____ शोषित पीड़ित दलित पिछड़े अल्पसंख्यक और आदिवासी हुए हुए सजग संघर्ष के लिए तैयार..!!
____ वोट अधिकार यात्रा के भय से चुनाव आयोग हुआ परेशान..!!
____ वोट चोरी से बनी सरकार का जनता के सरोकारों से नहीं ताल्लुक आम आदमी परेशान…!!
नई दिल्ली. ..!!
वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान तेजी पकड़ता जा रहा है लोकतंत्र के लिए यह शुभ संकेत है लोकतंत्र में वोट का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों का चयन करने और सरकार के गठन में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है वोट चोरी कर आम जनता खासकर के दलितों पिछड़ों आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का यह अधिकार छींनना चाहते हैं जबसे वोट चोरी के मामले का सबूतों के साथ खुलासा हुआ है तब से सारा वोट चोर तंत्र बचाव की मुद्रा अपने आपको पाक-साफ साबित करने की नाकाम कोशिशें करने में जुटा हुआ है…!!!
चुनाव में हार जीत चुनाव के दो पहलू है जिसे सहर्ष स्वीकार करना लोकतंत्र की ख़बसूरती है परन्तु चुनाव के नाम पर वोट चोरी कर मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से बंचित कर लोकतंत्र की हत्या है वोट चोरी का मामला लंबे समय से उठता चल रहा है परंतु सबूत के अभाव में इस मामले को हार जीत तक ही सीमित कर दिया था यहां तक कि हरने वाले पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगा दिया जाता था जिसकी वजह से वोट चोरी का मामला दब जाता था…!!
लोकतंत्र में मतदाताओं का वोट देना एक अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है नागरिकों को अपने वोट का उपयोग करने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह उनकी जिम्मेदारी भी है कि वे अपने वोट का उपयोग करके एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान करें परन्तु चुनाव आयोग ने सरकार से हाथ मिला कर नागरिकों का यह अधिकार भी छीन लिया मतदान के बाद चुनाव परिणाम जब चौंकाने वाले आने लगे तो मतदाताओं को वोट चोरी की आशंका होने लगी लम्बे समय से ईवीएम हटाओ की आवाज बुलंद हो रही हैं जिसे अब ताकत मिली हैं. .!!
वोट चोरी से बनी सरकार का .नीतियों का निर्धारण.जवाबदेही.सामाजिक परिवर्तन.नागरिक अधिकारों की रक्षा जैसे सामाजिक सरोकारों से इस सरकार का कोई लेना देना नहीं हैं सरकार में बैठे सांसद विधायक मंत्री कि वह जनता के वोट नहीं वोट चोरी करके जीते हैं इसलिए हर समस्या घटना आपत्ति के समय वह नैतिक जिम्मेदारी को नहीं समझते हैं जनता को ठेगा दिखाकर सत्ता का मजा लेने से नहीं चूकते हैं..!!
मनुवादी फासीवाद को समझना होगा हर हाल में शोषित पीड़ित दलित पिछड़े और आदिवासी अल्पसंख्यकों को एक होकर लोकतंत्र में अपने वोट की कीमत समझनी होगी और वोट का अधिकार बढ़ाने के लिए जन संघर्ष के लिए अपने आप को तैयार करना पड़ेगा तभी हम संविधान और लोकतंत्र को सुरक्षित बचा कर रख सकेंगे..!!
