_____ ललई सिंह यादव जाति, धर्म और धार्मिक आंधविश्वास से मुक्त समाज की स्थापना के लिए थे समर्पित. ..!!
_____ दक्षिण भारतीय समाज सुधारक पेरियार ई.वी.रामासामी की विचारधारा को उत्तर भारत में फैलाने और सामाजिक न्याय के लिए ललई सिंह यादव ने लिखीं कई विवादित पुस्तकें…!!
_____ ललई सिंह यादव ने जातिवाद, ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता के खिलाफ मुक्त भाषण और लेखन के माध्यम से किया था संघर्ष …!!
मैनपुरी / उत्तर प्रदेश. ..!!
ललई सिंह यादव 1 सितंबर 1911 – 7 फरवरी 1993 एक समाजसेवी और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्हें उत्तर भारत का ‘पेरियार’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने दक्षिण भारतीय समाज सुधारक पेरियार ई.वी.रामासामी की विचारधारा को उत्तर भारत में फैलाने और सामाजिक न्याय के लिए कई विवादित पुस्तकों को लिखा…!!
ललई सिंह यादव का जन्म कानपुर देहात जिले के कठारा गांव में हुआ था। ललई सिंह यादव ने जातिवाद, ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता के खिलाफ मुक्त भाषण और लेखन के माध्यम से संघर्ष किया…!!
उन्होंने हिंदी में कई नाटक और पुस्तकें लिखीं, जिनमें “सिपाही की तबाही” और “सच्ची रामायण” प्रमुख हैं। उन्होंने पुलिस और सेना कर्मियों को संगठित कर देश की आज़ादी और समाज सुधार की दिशा में भी काम किया…!!
1967 में उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार किया और जातिवाद विरोधी आंदोलन में सक्रिय हुए। उनके कार्यों के कारण उन्हें उत्तर भारत का पेरियार कहा गया और वे बहुजनों के प्रखर योद्धा माने जाते हैं…!!
ललई सिंह यादव ऐसा समाज बनाना चाहते थे जो जाति, धर्म और धार्मिक आंधविश्वास से मुक्त हो। वे मानते थे कि सामाजिक विषमता और अन्याय का मुख्य कारण वर्ण व्यवस्था, जाति व्यवस्था और धार्मिक ग्रंथों में निहित अंधविश्वास हैं। उनका दृष्टिकोण था कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और समाज में बराबरी तभी आएगी जब इन झूठे धार्मिक और जातिगत जंजीरों को तोड़ा जाएगा…!!
उन्होंने सामाजिक न्याय, बराबरी, और मानव अधिकारों के लिए जोरदार संघर्ष किया और जाति-धर्म के नाम पर बांटना सबसे बड़ा अपराध माना…!!
उन्होंने चेतावनी दी कि प्रश्न करना ही आजादी की पहली सीढ़ी है और बिना सवाल किए इंसान गुलाम बना रहता है। उनके लिए सामाजिक स्वतंत्रता राजनीतिक स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण थी, और वे चाहते थे कि समाज में इंसान एक समान और आजाद हो, बिना जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव के…!!
उन्होंने पौराणिक और धार्मिक कहानियों पर भी सवाल उठाए और इन्हें जो सामाजिक असमानता पैदा करते हैं, उनसे लड़ने की बात कही। उनका जीवन सामाजिक बदलाव, विरोध और नई सोच के निर्माण की कहानी थी। वे हिंदी और उत्तर भारत के लिए पेरियार भी कहे जाते हैं,..!!
उन्होंने दलित, पिछड़े और हाशिए के समाज में जागरूकता जगाई और समानता की राह दिखाई। इस प्रकार, ललई सिंह यादव का उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना था जिसमें इंसानियत, समानता, और सामाजिक न्याय सर्वोपरि हो, न कि जाति या धर्म के आधार पर विभाजन हो…!!
