____ शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह को उनके जन्म दिन कर क्रांतिकारी सलाम. ..!!
नई दिल्ली. .!!
शहीद ए आज़म सरदार भगत सिंह का आज जन्मदिन है हम उन्हें क्रांतिकारी सलाम पेश करता हूं उनकी शहादत को नमन करता हूं इंकलाब ज़िंदाबाद …!!
साथियों और दोस्तों…
हर रोज हजारों लोग इस धरती पर पैदा होते हैं। अपना किरदार निभाते हैं और पंचतत्व में विलीन हो जाते हैं, लेकिन ऐसे बहुत कम हैं जो धरती पर पैदा होने से लेकर प्राण निकलने तक के क्षण को अमर कर देते हैं। ऐसी ही एक तारीख है 28 सितंबर आज के ही दिन भगत सिंह का जन्म हुआ था छोटी सी उम्र में शोषण मुक्त सामज का सपना देखने वाले शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की शहादत को सलाम करता हूं देश भर के युवाओं से अपील करता हूं भगत सिंह को पढ़ता आज की परिस्थितियों अति आवश्यक है भगत सिंह को पढ़ना ही उनके जन्म दिन पर उन्हें याद करने का सबसे बेहतर तरीका होगा…!!
बताते चले 23 मार्च, 1931… इसी दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों को लाहौर सेंट्रल जेल से तय समय से एक दिन पहले ही फांसी पर लटका दिया गया। दरअसल, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत में हमारे देश की परंपरा, संघर्ष और बिना क्रेडिट मातृभूमि की सेवा का फलसफा है समाज में शांति और सबकी तरक्की का रास्ता है…!!
भगत सिंह की एक ऐसे समाज के निर्माण की सोच रही है जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नहीं, जिसमें धर्म के नाम पर अंधभक्ति के लिए कोई जगह नहीं, जिसमें जात-पात के नाम पर बंटवारे के लिए कोई जगह नहीं, जो फांसी से ठीक पहले अपने वैचारिक प्रतिद्वंद्वी को धन्यवाद कहना नहीं भूलते….!!
ऐसे नायकों की शहादत और सोच को इतिहास के पन्नों से निकाल कर युवा पीढ़ी को रू-ब-रू कराना जरूरी है, जिससे भविष्य के भारत के लिए रोशनी लाई जा सके शहीद भगत सिंह एक ऐसा नाम हैं जो इंकलाब ज़िंदाबाद का पर्याय बन गया था …!!
शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की 23 साल 176 दिन की जिंदगी, उनकी सोच और तौर-तरीकों को लेकर लोगों के बीच मंथन चलता रहता है और चलना भी चाहिए भगत सिंह की एक जेब में किताब और दूसरी जेब में पिस्तौल क्यों हुआ करती थी..?? भगत सिंह जानबूझ कर सांडर्स मर्डर टीम का हिस्सा क्यों बने…?? सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के बाद नहीं भागना किस तरह की रणनीति का हिस्सा था…?? कोर्ट में भगत सिंह की जिरह ने किस तरह देश के दिग्गज वकीलों और स्वतंत्रता सेनानियों को नया रास्ता दिखाया…?? शहीद-ए-आजम किस तरह के भारत का सपना लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर लटक गए उनके द्वारा जेल से लिखी गई चिट्ठियां उनकी शख्सियत, सोच और सरोकार के किस पक्ष से दुनिया का साक्षात्कार कराती हैं यह जानने के लिए भगत सिंह को पढ़िए उनके विचारों को आत्मसात करना ही उन्हें याद करने का बेहतर तरीका होगा..!! इंकलाब ज़िंदाबाद. जिंदाबाद जिंदाबाद. .!!
